अपने सैन्य करियर में सैम ने कई कठिनाईयों का सामना किया। छोटी सी उम्र में ही उन्हें युद्ध में शामिल होना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैम के शरीर में 7 गोलियां लगीं थी। सबने उनके बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन डॉक्टरों ने समय रहते सारी गोलियां निकाल दीं और उनकी जान बच गई।
इतिहास के पन्नों में दर्ज इंदिरा गांधी और सैम मानेकशॉ का यह किस्सा का काफी मजेदार है। दरअसल, वर्ष 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पाकिस्तान पर हमला करना चाहती थीं। लेकिन जनरल सैम ने पाकिस्तान से युद्ध करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी से कहा कि इस वक्त हमारी सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं है। सेना को प्रशिक्षित करने के लिए कुछ समय चाहिए। यह सुनकर इंदिरा दंग रह गईं। उन्होंने सेना के प्रशिक्षण के लिए कुछ समय दिया और 1971 में सैम के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के साथ युद्ध किया।
सैन मानेकशॉ को अपने सैन्य करियर के दौरान कई सम्मान प्राप्त हुए। 59 की उम्र में उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि से नवाजा गया। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय जनरल थे। 1972 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। एक साल बाद 1973 में वह सेना प्रमुख के पद से रिटायर हो गए। सेवा-निवृत्ति लेने के बाद वह वेलिंगटन चले गए। वेलिंगटन में ही वर्ष 2008 में उनका निधन हो गया।