भारत के हर रेल इंजन पर एक तिरंगा बना होता है। इन्हें बनाने में भी उन्हीं नियमों का पालन होता है, जिनका उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे को बनाने में किया जाता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस परंपरा की शुरुआत महज तीन साल पहले ही हुई है। दरअसल, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के चाचा सुजीत आजाद तिवारी और उनके पुत्र अमित आजाद ने साल 2016 के जून महीने में तत्काल रेलमंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान उन्होंने रेलमंत्री से देश के शहीदों के नाम पर ट्रेनों को चलाने की मांग की थी। उन्होंने रेलमंत्री को रेल इंजनों पर पंद्रह अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के अवसरों पर तिरंगा लगाए जाने का भी सुझाव दिया था।