अपने संदेश में उपराष्ट्रपति नायडू ने लिखा कि हमारे देश भारत को विश्व गुरु (पूरी दुनिया के शिक्षक) के रूप में जाना जाता था, जो दुनिया के विभिन्न कोनों से विभिन्न विषयों में ज्ञान-चाहने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता था। नायडू ने कहा कि वे अपनी बुद्धि को कुशाग्र करने, नया ज्ञान हासिल करने, अपने कौशल को निखारने और अपनी बौद्धिक सीमाओं का विस्तार करने के लिए लोग दूर- दूर से यहां आया करते थे। उपराष्ट्रपति ने प्राचीन भारत के गाैरवशाली ग्रंथों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए लिखा कि चरक संहिता, आर्यभट्टीय, अर्थशास्त्र, शुक्रनीतिसार और पतंजलि के योग सूत्र कई प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथों में से हैं जो प्राचीन भारत के ज्ञान के विशाल भंडार की गवाही देते हैं।
ज्ञान के विशाल भंडार की गवाही देते हैं ग्रंथ
उन्होंने कहा कि उस समय की शिक्षा प्रणाली औपचारिक और अनौपचारिक दोनों थी, जिसमें गुरुकुल, पाठशालाएं और यहां तक कि मंदिर भी व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। नायडू ने याद करते हुए कहा, इसके मूल में उस समय की अनूठी गुरु-शिष्य परंपरा थी, जिसमें विद्वान गुरु ने एक उत्सुक, आज्ञाकारी और समर्पित शिष्य को महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाने के अलावा ज्ञान का एक विशाल खजाना दिया था।
नई शिक्षा नीति से आएगा बदलाव
उपराष्ट्रपति नायडू ने लिखा कि नई शिक्षा नीति (NEP)-2020 का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना और एक नया शिक्षण क्रम तैयार करना है जो भारत की परंपराओं और मूल्य प्रणालियों पर निर्माण करते हुए 21वीं सदी की शिक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा, बिल्कुल उचित रूप से, नई शिक्षा नीति (New Education Policy) - 2020 शिक्षक को शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधारों के केंद्र में रखता है। नायडू ने आगे लिखा कि नई शिक्षा नीति एक उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में मदद करेगी, जहां शिक्षक और छात्र दोनों अपनी पूरी क्षमता का अहसास करेंगे और सभी क्षेत्रों में मानवता की उन्नति के लिए योगदान देंगे।