फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Teachers Day 2021: उपराष्ट्रपति नायडू बोले, यह भारत के फिर से विश्व गुरु बनने का समय

Sun, 05 Sep 2021 05:32 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Teachers Day 2021: उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि चरक संहिता, आर्यभट्टीय, अर्थशास्त्र, शुक्रनीतिसार और पतंजलि के योग सूत्र कई प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथों में से कुछ प्रमुख हैं जो प्राचीन भारत के ज्ञान के विशाल भंडार की गवाही देते हैं।
विज्ञापन
Vice President M Venkaiah Naidu - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि समय आ गया है कि भारत एक बार फिर से ‘विश्व गुरु’ बने और ज्ञान और नवाचार के केंद्र के रूप में उभरे। उन्होंने यह भी कहा कि देश को न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को संरक्षित करने का भी प्रयास करना चाहिए। 

विज्ञापन


देश के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के तौर पर चिह्नित करने के लिए एक फेसबुक पाेस्ट के रूप में जारी संदेश में, नायडू ने कहा कि हम में से हर एक, जीवन में अपने करियर के विकल्पों के लिए हमारे शिक्षकों द्वारा दी गई सलाह और मार्गदर्शन के लिए काफी हद तक ऋणी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्राचीन काल में शिक्षा का एक प्रशंसित केंद्र था। 

विश्व गुरु के तौर पर विख्यात था भारत

अपने संदेश में उपराष्ट्रपति नायडू ने लिखा कि हमारे देश भारत को विश्व गुरु (पूरी दुनिया के शिक्षक) के रूप में जाना जाता था, जो दुनिया के विभिन्न कोनों से विभिन्न विषयों में ज्ञान-चाहने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता था। नायडू ने कहा कि वे अपनी बुद्धि को कुशाग्र करने, नया ज्ञान हासिल करने, अपने कौशल को निखारने और अपनी बौद्धिक सीमाओं का विस्तार करने के लिए लोग दूर- दूर से यहां आया करते थे। उपराष्ट्रपति ने प्राचीन भारत के गाैरवशाली ग्रंथों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए लिखा कि चरक संहिता, आर्यभट्टीय, अर्थशास्त्र, शुक्रनीतिसार और पतंजलि के योग सूत्र कई प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथों में से हैं जो प्राचीन भारत के ज्ञान के विशाल भंडार की गवाही देते हैं।

ज्ञान के विशाल भंडार की गवाही देते हैं ग्रंथ

उन्होंने कहा कि उस समय की शिक्षा प्रणाली औपचारिक और अनौपचारिक दोनों थी, जिसमें गुरुकुल, पाठशालाएं और यहां तक कि मंदिर भी व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। नायडू ने याद करते हुए कहा, इसके मूल में उस समय की अनूठी गुरु-शिष्य परंपरा थी, जिसमें विद्वान गुरु ने एक उत्सुक, आज्ञाकारी और समर्पित शिष्य को महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाने के अलावा ज्ञान का एक विशाल खजाना दिया था।

नई शिक्षा नीति से आएगा बदलाव
विज्ञापन

उपराष्ट्रपति नायडू ने लिखा कि नई शिक्षा नीति (NEP)-2020 का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना और एक नया शिक्षण क्रम तैयार करना है जो भारत की परंपराओं और मूल्य प्रणालियों पर निर्माण करते हुए 21वीं सदी की शिक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा, बिल्कुल उचित रूप से, नई शिक्षा नीति (New Education Policy) - 2020 शिक्षक को शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधारों के केंद्र में रखता है। नायडू ने आगे लिखा कि नई शिक्षा नीति एक उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में मदद करेगी, जहां शिक्षक और छात्र दोनों अपनी पूरी क्षमता का अहसास करेंगे और सभी क्षेत्रों में मानवता की उन्नति के लिए योगदान देंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें