शिक्षा क्षेत्र में भी अब ‘वन नेशन वन डाटा ‘ होगा। इसमें सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल, फार्मेसी व कृषि विश्वविद्यालयों के छात्रों, शिक्षकों, कोर्स, पाठ्यक्रम की जानकारियां एक जगह होंगी। अभी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए), राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) अलग-अलग काम करती थी। मिशन मोड में दिसंबर 2023 तक सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का डाटा इस ‘वन नेशन वन डाटा’ पर अपलोड हो जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ‘वन नेशन वन डाटा’ की योजना तैयार हुई है। धर्मशाला में जून 2022 में आयोजित सभी प्रदेशों के मुख्य सचिवों की बैठक में इस पर चर्चा हुई थी। इसके बाद एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, एआईसीटीई, आईआईटी कांउसिल के अधिकारी शामिल थे। इसकी रूपरेखा भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की सूची में शुमार करने के मकसद और विजन इंडिया एट 2047 यानी आजादी के 100 साल में भारतीय शिक्षा के तहत तैयार की गई है।
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी सीधे भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की जानकारी एकत्रित करती हैं। लेकिन अलग-अलग प्लेटफार्म पर विभिन्न आंकड़ों से परेशानी होती है। इस कारण भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग पिछड़ जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। भारत की योजना देश के शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग में सुधार लाना है। इसके अलावा विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को भारतीय संस्थानों से जोड़ना है।