'हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं है': सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस नीति से फिलहाल सहमत नहीं है। पीठ ने कहा, 'हम इस मामले को विस्तार से सुनेंगे। हमें अभी भी इस नीति का औचित्य समझाया जाना बाकी है। हम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और इसकी जांच करेंगे।'
कोर्ट ने यह टिप्पणी उस समय की जब वह नीट पीजी 2025 के प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) को सार्वजनिक करने की मांग से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
एनबीई ने क्या दलील दी?
इस मामले में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि प्रश्नपत्र और आंसर-की को सार्वजनिक न करने की नीति का उद्देश्य एक 'दुर्लभ राष्ट्रीय संपत्ति' की रक्षा करना है।
एनबीई (NBE) के अनुसार, इस नीति से प्रश्नपत्रों के दुरुपयोग और शोषण को रोका जा सकता है, खासकर कोचिंग इंडस्ट्री द्वारा इनके व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नीट पीजी परीक्षा में अलग-अलग उम्मीदवारों को अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट दिए जाते हैं। ऐसे में आंसर-की और प्रश्नपत्र सार्वजनिक न होने के कारण उम्मीदवार यह देख ही नहीं पाते कि उन्होंने किन सवालों के क्या उत्तर दिए और कहां गलती हुई।
उनका तर्क है कि इस व्यवस्था से उम्मीदवारों को पारदर्शी और उम्मीदवार-विशेष (Candidate-wise) मूल्यांकन देखने का अवसर नहीं मिलता, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
पहले भी जारी हो चुके हैं नोटिस
इससे पहले, 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज को नोटिस जारी किया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन शामिल थे। यह नोटिस उन याचिकाओं पर जारी किया गया था, जिनमें नीट पीजी 2025 की आंसर-की प्रकाशित करने की मांग की गई थी।