जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि बीडीएस प्रवेश की अंतिम तिथि 11 अप्रैल से बढ़ाकर 15 मई कर दी गई है और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने केंद्र से कट-ऑफ अंक कम करने की सिफारिश की है।
ऐसे में पीठ ने कहा, चूंकि प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है, रिक्त सीटों की सीमा और इस अदालत के फैसले के संबंध में, यह उचित होगा कि केंद्र सरकार द्वारा पर्सेंटाइल से संबंधित मुद्दे पर नए सिरे से विचार किया जाए। हम तदनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से एक सप्ताह की अवधि के भीतर प्रावधानों के संदर्भ में नए सिरे से विचार करने का आग्रह करते हैं।
कट ऑफ अंक ज्यादा होने से नहीं हो पा रहे दाखिले
सुप्रीम कोर्ट की पीठ नीट परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे दंत चिकित्सक बनने के इच्छुक उम्मीदवारों की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उम्मीदवारों ने रिक्त सीटों को भरने के लिए डेंटल काउंसिल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए अनुशंसित किए गए कट-ऑफ अंकों के आधार पर नए सिरे से मॉप-अप राउंड काउंसलिंग आयोजित करने की मांग की थी, क्योंकि हजारों सीटें खाली हैं और कट ऑफ कम नहीं होने के कारण हजारों छात्र उन सीटों पर दाखिला नहीं ले पा रहे हैं।
27,698 सीटों में से लगभग 9,000 सीटें रिक्त
वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने शीर्ष कोर्ट को जानकारी दी कि बीडीएस पाठ्यक्रमों के लिए 27,698 सीटों में से अब तक लगभग 9,000 सीटें अभी भी खाली हैं। उन्होंने दाखिले के लिए सरकार के पहले के फैसलों का हवाला भी दिया, जब उसने 2019-20 में कट-ऑफ अंक कम कर दिए थे। साथ ही इस बार कट-ऑफ अंक कम नहीं करने को लेकर आश्चर्य जताया।
सरकार इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार कर सकती है
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कट-ऑफ अंक कम नहीं करने के लिए आठ अप्रैल को निर्णय लिया गया था, जिस पर पीठ ने कहा कि उस समय प्रवेश की अंतिम तिथि 11 अप्रैल थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 मई, 2022 कर दिया गया है। पीठ ने कहा कि क्योंकि रिक्त सीटों की संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रवेश की तिथि बढ़ा दी गई है, इसलिए सरकार इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार कर सकती है।