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Success Story: सेल्फ स्टडी के जरिए ओलंपियाड में जीता गोल्ड फिर कैंब्रिज में पाया दाखिला, पढ़िए अध्ययन की कहानी

सार

सेल्फ स्टडी एक बेहतर विकल्प होता है। यहां आप खुद कॉन्सेप्ट समझते हैं, हल न निकलने पर बार बार सवाल को सॉल्व करने की कोशिश करते हैं। जिस की वजह से आपको कॉन्सेप्ट और बेहतर तरीके से समझ आया है। - अध्ययन शुक्ला
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अध्ययन शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई के लिए विदेश जाने का सपना लाखों विद्यार्थी देखते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2018 में 7,50,000 से अधिक भारतीय छात्रों के विदेशी स्कूलों में पढ़ने की सूचना मिली थी। हालांकि, इन विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला पाना बेहद मुश्किल होता है। यहां 50 फीसदी सीटें स्वदेशी और 50 फीसदी विदेशी छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं। वहीं विदेशी छात्रों की आरक्षित सीटों के लिए दुनियाभर के विद्यार्थी आवेदन करते हैं।

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ऐसे में दाखिला पाने के लिए आपका एकेडमिक रिकॉर्ड और आपकी तैयार अन्य से काफी बेहतर होनी चाहिए। इसका एक बेहतरीन उदाहरण गुरुग्राम,हरियाणा के रहने वाले अध्ययन शुक्ला का है। जिन्होंने दो सालों में न केवल आठ ओलंपियाड क्वालीफाई किए हैं बल्कि उनमें ब्रॉन्ज/ गोल्ड अवॉर्ड भी जीता है और अभी यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से गणित में स्नातकोत्तर कर रहे हैं। अगर आप भी विदेश जाकर पढ़ाई का सपना देख रहे हैं, तो अध्यन द्वारा दिए गए टिप्स आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं। पढ़िए...

विदेश में पढ़ाई के लिए ओलंपियाड्स क्यों जरूरी हैं?

अमर उजाला डिजिटल की एजुकेशन टीम से खास बातचीत में अध्ययन बताते हैं कि मुझे हमेशा से ही साइंस विशेषकर गणित में गहरी रूचि रही है। छठवीं कक्षा तक आते-आते गणित के कठिन से कठिन सवाल को हल करने में मेरी स्किल और उसे और गहराई से समझने की मेरी रुचि बढ़ती गई। अपनी इस काबिलियत को परखने के लिए मैंने मैथेमैटिक्स ओलंपियाड देने शुरू किए। इससे मेरे सोचने और गणित को समझने दोनों का तरीका बदल गया। ओलंपियाड एक ऐसी परीक्षा थी जिससे मैं अपने स्तर का आंकलन करता था और आगे की तैयार भी उसी के हिसाब से करता था। इस दौरान कभी कम अंक आए, कभी कांस अवॉर्ड जीता, तो कभी गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

इस तरह मैंने ओलंपियाड से लेकर विदेशी विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए की तैयारी

अध्ययन आगे बताते हैं कि अक्सर हम किसी भी परीक्षा चाहे वो स्कूल स्तर की हो या ओलंपियाड की तैयारी  करने के लिए कोचिंग का सहारा लेते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि सेल्फ स्टडी एक बेहतर विकल्प होता है। यहां आप खुद कॉन्सेप्ट समझते हैं, हल न निकलने पर बार बार सवाल को सॉल्व करने की कोशिश करते हैं। जिस की वजह से आपको कॉन्सेप्ट और बेहतर तरीके से समझ आया है। यही कारण है कि मैंने अभी तक कोचिंग का सहारा नहीं लिया। हर परीक्षा को सेल्फ स्टडी के जरिए ही क्वालीफाई किया। ध्यान देने वाली बात ये हैं कि कोरोना महामारी की वजह से पहले से कई गुना ज्यादा कोर्स और मटेरियल ऑनलाइन उपलब्ध है, जो सेल्फ स्टडी में आपकी काफी सहायता करते हैं।

क्या है स्टैनफोर्ड ऑनलाइन हाई स्कूल, जहां कर सकते हैं दसवीं से लेकर बारहवीं की पढ़ाई?

मैंने गणित को और बेहतर तरीके से समझना चाहता था, उसका अध्ययन करना चाहता था। इसलिए 2019 में मैंने स्टैनफोर्ड ऑनलाइन हाई स्कूल में दाखिला लिया। यहां आपको दसवीं और बारहवीं के स्तर की पढ़ाई करवाते हैं। ये रेगुलर स्कूल को ही तरह होता है, जहां आप अपने मनपसंद विषय की पढ़ाई कर सकते हैं। लेकिन ये पूरा कोर्स ऑनलाइन होता है। कई लोग सिर्फ इसी के जरिए अपनी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई करते हैं। लेकिन मैंने इसके साथ - साथ गुरुग्राम के एक स्कूल से दसवीं और बारहवीं भी की। क्योंकि ऑनलाइन क्लास के जरिए आप विषय का अध्ययन तो कर सकते हो, लेकिन सोशल एक्टिविटीज, मैनर्स, समाज से जुड़ा रेहान ये सब आप सिर्फ स्कूल से ही सीख सकते हैं। इसलिए मैंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मध्यम से अपनी दसवीं से लेकर बारहवीं की पढ़ाई पूरी की।
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कैसे मिला कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला?

यूके के यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेने के लिए सेट को परीक्षा देना जरूरी होता हैं। मैंने सेट में गणित और भौतिक विज्ञान में 800 में से 800 अंक हासिल किए। वहीं रीजनिंग टेस्ट में 1600 में से 1580 अंक मिले। दसवीं में गणित और रसायन विज्ञान में नेशनल टॉपर और इतने ओलंपियाड क्वालीफाई करने की वजह से मुझे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला।
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