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Success Story: आंध्र प्रदेश का एक लड़का, 10वीं तक की पढ़ाई कर पहुंचा माइक्रोसॉफ्ट कंपनी

Tue, 12 Dec 2017 11:08 AM IST
amarujala.com- Presented by: श्रीलता बिश्वास
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कोटि रेड्डी
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आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मे और सरकारी स्कूल में सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई करने वाले कोटि रेड्डी ने साबित किया है कि कामयाब बनने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं है। डिग्री नौकरी पाने का एक जरिया हो सकती है, लेकिन वो कामयाबी की गारंटी नहीं दे सकती। ऐसा ही हुआ है आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मे कोटि रेड्डी के साथ। 
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एक दिन कोटि रेड्डी को पिता ने कपड़े खरीदने के लिए 1000 रुपये दिए, उस पैसे से उन्होंने 'सी लैंग्वेज' सीखने का फैसला लिया लेकिन उनके पिता इस फैसले से खुश नहीं थे और जमकर पिटाई कर दी। इसके बावजूद कोटि रेड्डी अपने फैसले से पीछे नहीं हटे। उन्होंने इसके अलावा कई मुश्किलें भी झेलीं। कई बार वो भूखे पेट सोए। एक किराने की दुकान में 700 रुपए प्रतिमाह की नौकरी की। धीरे-धीरे वो उसी कोचिंग सेंटर के मालिक भी बने जहां उन्होंने कंप्यूटर चलाना सीखा था।

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koti reddy
कोटि रेड्डी पहले तो गांव की लाइब्रेरी आते-जाते रहे और वहां से वो कस्बे की लाइब्रेरी में जाने लगे। जो कि उनके गांव से काफी दूर थी। वे वहां तक पैदल ही आते-जाते थे। वहां उन्होंने कई दिग्गजों की जीवनियां पढ़ डाली। सबसे ज्यादा उन्हें बिल गेट्स की कहानी ने प्रभावित किया जो कि कॉलेज ड्रॉप आउट थे। कोटि रेड्डी बिल गेट्स को अपना आदर्श मानने लगे।
कोटि रेड्डी उन दिनों काफी संघर्ष कर रहे थे और अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद में जुटे थे, लेकिन ऐसे ही वक्त उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना से वो भीतर तक टूट गए, वहीं उन्होंने यह भी तय किया कि आगे वो हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार रहेंगे।
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koti reddy
इन सबक बावजूद कोटि रेड्डी धीरे-धीरे जावा व सी लैंग्वेज सीखते रहे और आगे बढ़ते रहे। धीरे-धीरे वो स्टूडेंट से शिक्षक और फिर इंस्टीट्यूट के मालिक बन गए। एक दिन उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी ने चीफ टेक्निकल ऑफिसर यानी ‘सीटीओ’ बनाने की पेशकश की। वो ‘सीटीओ’ की जिम्मेदारी संभालने के लिए बंगलुरू जाने की तैयारी में जुटे ही थे कि उन्हें बिल गेट्स की कंपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ से बुलावा आया। जिसके बाद वो इंटरव्यू की तैयारी में जुट गए।
कोटि कहते हैं कि वो बिल गेट्स को भगवान मानते हैं और माइक्रोसॉफ्ट उनके लिए मंदिर जैसा है। सरकारी स्कूल में सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई करने वाले कोटि रेड्डी ने साबित कर दिखाया कि सफल होने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती। डिग्री से तो सिर्फ नौकरी भर मिलती है, लेकिन सफलता तो आपको मेहनत और काबिलियत के दम पर ही मिलती है।
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