सफलता का श्रेय कोचिंग और साईकिल को
नाजिया झालावाड़ जिले के पचपहाड़ नामक गांव की रहनी वाली हैं। उनके पिता इसामुद्दीन टेम्पो चलाने का काम करते हैं। उनकी मां और मां अमीना बी एक घरेलू महिला हैं एवं खेतों में मजदूरी करती हैं। नाजिया ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोटा स्थित कोचिंग संस्थान को दिया है। साथ ही नाजिया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई साइकल ने भी उन्हें सफलता प्राप्त करने में काफी मदद की है।
नाजिया ने 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई के लिए एक अन्य विद्यालय में प्रवेश लिया था। यह स्कूल उनके घर से काफी दूर था। 9वीं कक्षा में सरकार द्वारा प्रदान की गई साईकिल ने नाजिया के सपनों को उड़ान देने में मदद की। इसकी मदद से ही वह अपने स्कूल जाती थी।
छात्रवृति बनी वरदान
एक गरीब और अशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाली नाजिया को सरकार से मिलने वाली छात्रवृति से भी काफी मदद मिली। पढ़ाई में होनहार नाजिया को दसवीं और बारहवीं दोनों ही कक्षाओं में छात्रवृति की सौगात मिली थी। इसकी मदद से ही उन्होंने अपने जिले के पास कोटा शहर में स्थित एक कोचिंग में दाखिला लिया। उनकी लगन को देखकर कोचिंग संस्थान ने भी उनकी आधी से ज्यादा फीस माफ की। इससे उन्हें सफलता प्राप्त करने का मनोबल भी मिला। नाजिया के अनुसार छात्रवृति उनके लिए एक वरदान से कम नहीं थी।