जो तूफानों में पलते जा रहे हैं,
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं।
ये शायरी भारतीय अमरीकी ऋषि शाह पर बिल्कुल फिट बैठती है। एक जमाना था जब ऋषि के पास सपने देखने के अलावा कुछ नहीं था, लेकिन आज अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अरबों की कंपनी के मालिक हैं।
ऋषि ने आंत्रप्रन्योर बनने के सपने को न केवल देखा बल्कि इस सपने को जिया भी और इसलिए साल 2006 में अपनी पढ़ाई छोड़ शिकागो आ गए। यहां उन्होंने अपनी दोस्त श्रद्धा अग्रवाल के साथ मिलकर हेल्थ केयर टेक कंपनी आउटकम हेल्थ की शुरुआत की।
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बहन से मिली प्रेरणा
ऋषि को हेल्थ केयर टेक कंपनी खोलने की प्रेरणा अपनी बहन से मिली। बहन की बीमारी ने उन्हें मेडिकल इनफार्मेशन की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया। साल 2008 में ऋषि और श्रद्धा ने कॉन्टेक्स्टमीडिया नाम की एक कंपनी की नींव रखी। कंपनी बिना किसी बाहरी निवेश के फिजिशियनों और अस्पतालों को विडियो मॉनिटर सर्विसेज बेचने लगी।
धीरे-धीरे कंपनी का काम-काज बढ़ा और बड़े निवेशकों की नजर उस पर पड़ी, लेकिन शाह और अग्रवाल ने ऑर्गेनिकली बढ़ने और मालिकाना हक अपने पास रखने के मकसद से इन्वेस्टमेंट ऑफर्स ठुकरा दिए।
वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता
ऋषि शाह
बाद में जब कंपनी की फंडिग बढ़ी तो इसका नाम बदलकर आउटकम हेल्थ कर दिया गया। आज इस कंपनी को यूनिकॉर्न कंपनी का दर्जा प्राप्त है, साथ ही ये एक बिलियन डॉलर मूल्य की करीब 200 कंपनियों की सूची में टॉप 30वां स्थान भी हासिल कर चुकी है।
ऋषि की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपनी मेहनत के बलबूते कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते हैं। उन्हें पता होता है कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता, वो बदलता जरूर है लेकिन हमें अपनी मंजिल बार-बार बदलने के बजाय डटे रहना चाहिए।