एस सोमनाथ के बारे में...
केरल के अलापुझा जिले में साल 1963 में जन्में सोमनाथ का पूरा नाम श्रीधर परिकर सोमनाथ है। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई स्थानीय शिक्षण संस्थानों से हुई। इसके बाद सोमनाथ ने केरल के कोल्लम स्थित टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। यहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सोमनाथ काफी तेज-तर्रार छात्र हुआ करते थे। इसके बाद उन्होंने बंगलुरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISc) से पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। वह यहां गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं।
PSLV डेवलप करने में योगदान
सोमनाथ की विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर बचपन से ही बड़ी रुचि थी। साल 1985 में एस सोमनाथ, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से जुड़ गए। करियर की शुरुआत पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) से की थी। यह प्रोग्राम भारत के स्पेस प्रोग्राम में गेम चेंजर साबित हुआ। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम उस समय इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर थे। PSLV को विकसित करने में सोमनाथ का खासा योगदान रहा है।
कई विषयों के एक्सपर्ट हैं सोमनाथ
वैज्ञानिक और इसरो ते मुखिया एस सोमनाथ एक नहीं, बल्कि कई विषयों के एक्सपर्ट हैं। वह लॉन्च व्हीकल डिजाइनिंग जानते हैं, उन्होंने लॉन्च व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डिजाइन, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स, मैकेनिज्म डिजाइन और पायरोटेक्निक में विशेषज्ञता हासिल की है।
अब इन बड़े मिशन की जिम्मेदारी
वैज्ञानिक डॉ. सोमनाथ इसरो से पहले विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और तरण प्रणोदन प्रणाली केंद्र के डायरेक्टर भी रहे हैं। इसरो के ज्यादातर मिशन में इस्तेमाल हुए रॉकेट में तकनीक को शामिल करने का काम इन्हीं दोनों संस्थानों ने किया है। चंद्रयान-3 के बाद डॉ. एस सोमनाथ के हाथों में दो बड़े मिशन की कमान होगी। इसमें आदित्य-एल1 और गगनयान शामिल है।
इसरो की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान
वैज्ञानिक एस सोमनाथ को बीते साल जनवरी में इसरो चीफ के पद पर नियुक्त किया गया। इसरो का मुखिया बनने से पहले एस सोमनाथ, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के निदेशक थे। उनके पहले ISRO चीफ के पद की जिम्मेदारी के. सिवन संभाल रहे थे। के सिवन के कार्यकाल में ही च्रदयान 2 की लॉन्चिंग हुई थी। Chandrayaan-2 के लैंडर के इंजन को भी सोमनाथ ने ही डेवेलप किया था।