मुरादाबाद के चमरोआ गांव के अमित कुमार ने मार्स रोवर बनाया है। आठवीं के छात्र अमित का मानना है कि अभी तो देश का पहला यान मंगलयान भेजा है। यह मंगल ग्रह की बाहरी कक्षा का चक्कर लगाएगा, लेकिन अगले अभियानों में हमें मंगल की सतह पर जाकर छानबीन करनी होगी। लिहाजा हमने मार्स रोवर तैयार किया है।
मार्स रोवर बनाने वाला बच्चा अमित ऐसे गांव का है, जहां के ज्यादातर लोग मंगल ग्रह के बारे में अनजान हैं। बकौल अमित, जब पिताजी को मॉडल के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि मंगल तो एक दिन होता है। रोवर किस चिड़िया का नाम है। वहीं, ज्यादातर गांव वाले भी मंगल ग्रह से अनजान हैं। अमित ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों ने काफी मदद की। इसी का नतीजा है कि वह मॉडल तैयार करने में कामयाब रहे।
देश भर के नन्हें वैज्ञानिक नया-नया आइडिया लेकर प्रगति मैदान में मौजूद हैं। मंगलवार को बच्चों के मॉडलों को देखने बड़ी संख्या में दिल्लीवासी राष्ट्रीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में पहुंचे। इस दौरान लोगों ने मॉडलों की बारीकियां जानी और बच्चों की तारीफ की।
मोबाइल से मकान की सुरक्षा
दादरी की विधि शर्मा कुमारी मायावती गर्ल्स इंटर कॉलेज में नौवीं की छात्रा हैं। इन्होंने तीन स्तरों पर मकान की सुरक्षा का मॉडल तैयार किया है। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, आईसी ड्राइवर और माइक्रो कंट्रोलर से मकान में लगे इलेक्ट्रॉनिक सामानों को मोबाइल से ऑन-ऑफ किया जा सकता है। वहीं, इंफ्यूरेंट सर्किट बोर्ड से मकान के सामने किसी अजनबी के आते ही हॉर्न बजेगा और लाइट जल जाएगी। साथ ही मकान के सामने लगाया गया बैरीकेड भी सेंसर के जरिए बंद हो जाएगा।
ऑटोमेटिक टोल प्लाजा
जम्मू के अजेश कुमार दसवीं के छात्र हैं। अजेश ने रेडियो तरंगों के सहारे ऑटोमेटिक टोल बनाया है। इस डिवाइस में वाहन पर चिपयुक्त एक सेंसर लगा होगा। यह प्रीपेड मोबाइल सेवा जैसा है। टोल बूथ से गुजरने पर रेडियो तरंगों का रीडर इसे स्कैन कर लेगा। इससे टोल टैक्स की कीमत वसूल ली जाएगी। खास बात यह कि वाहन चोरी होने पर सेंसर के सहारे उसकी लोकेशन भी जानी जा सकती है।
गंदे पानी से पैदा होगी बिजली
पिथौरागढ़ की पारुल जोशी नौवीं की छात्रा हैं। पहाड़ों में गंदे पानी की सफाई के लिए पारुल ने चार चरणों का एक मॉडल तैयार किया है। पहले चरण में गंदा पानी एक टैंक में इकट्ठा होगा। इसमें पानी में मौजूद भारी पदार्थ अलग होंगे। इसके बाद पानी को फिल्टर किया जाएगा। फिर, इसे सोडियम क्लोराइड युक्त एक टैंक में डाला जाएगा। इसमें आयनीकरण से बिजली पैदा होगी। आखिर में इस पानी का केमिकल ट्रीटमेंट होगा। इसका इस्तेमाल सिंचाई आदि कार्यों में हो सकता है।