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National Sports Day: हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जिन्होंने ठुकरा दिया था तानाशाह हिटलर का ऑफर

Mon, 29 Aug 2022 11:25 AM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Sports Day 2022: 29 अगस्त, 1905 को प्रयागराज ( तब के इलाहाबाद) में जन्मे मेजर ध्यानचंद का हॉकी खेल में पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं था।  उन्होंने करीब 22 साल तक भारत के लिए हॉकी खेला और इस दौरान 400 से अधिक इंटरनेशनल गोल दागे।
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National sports day 2022 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Sports Day 2022: 29 अगस्त की तारीख भारत के लिए बेहद खास है। आज हमारा देश राष्ट्रीय खेल दिवस मना रहा है। इस दिवस को देश के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वह हॉकी खेलते थे तो मानो ऐसा लगता था कि गेंद उनकी स्टिक से चिपक जाती थी। ध्यानचंद की उपलब्धियों ने अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान भी भारतीय खेल के इतिहास को नए शिखर पर पहुंचाया था। 

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करियर में 400 से अधिक गोल
29 अगस्त, 1905 को प्रयागराज ( तब के इलाहाबाद) में जन्में मेजर ध्यानचंद का हॉकी खेल में पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं था। उन्होंने करीब 22 साल तक भारत के लिए हॉकी खेला और इस दौरान 400 से अधिक इंटरनेशनल गोल दागे। उन्होंने लगातार तीन ओलंपिक (1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजेलिस और 1936 में बर्लिन) में भारत को हॉकी खेल में अपने दम पर स्वर्ण पदक दिलाया था।

ध्यानचंद - फोटो : SELF
16 की उम्र में सेना में शामिल हुए
मेजर ध्यानचंद के पिता सेना में थे और उसके लिए हॉकी खेलते थे। महज 16 वर्ष की उम्र में ध्यानचंद ने भी आर्मी जॉइन कर ली थी। इसी दौरान उन्हें भी मानो जैसे हॉकी से प्रेम ही हो गया था। ध्यानचंद को दुनिया में लगभग 55 देशों के 400 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इन्हीं उपलब्धियों के कारण उनके जन्मदिन को देश में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

जब ठुकराया था हिटलर का प्रस्ताव
कहानी साल 1936 में हुए बर्लिन ओलंपिक की है। जर्मनी के खिलाफ खेले गए हॉकी के मुकाबले में भारत ने उस पर 8-1 से बेहतरीन जीत दर्ज की थी। मैच में मेजर ध्यानचंद के खेल से जर्मनी का तानाशाह एडोल्फ हिटलर भी मुरीद हो गया था। मैच के बाद हिटलर ने मेजर ध्यानचंद से मुलाकात की और उन्हें अपनी सेना में बड़े पद का प्रस्ताव दिया। हालांकि, उन्होंने बड़ी ही विनम्रता के साथ हिचलर के इस ऑफर को ठुकरा दिया था। उन्होंने इस कदम से पूरी दुनिया में तारीफें बटोरी थी। 

DHYAN CHAND - फोटो : self
हॉकी से गेंद चिपकने के किस्से थे मशहूर
ऐसा माना जाता है कि मेजर ध्यानचंद हॉकी खेलते थे, तो मानो गेंद उनकी स्टिक से चिपक जाती थी। इस आशंका को दूर करने के लिए हॉलैंड (नीदरलैंड) में एक मैच के दौरान उनकी हॉकी स्टिक को तोड़कर चेक किया गया था। जापान में भी एक मैच के दौरान उनकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात भी कही गई थी।

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भारत सरकार देती है खेल रत्न पुरस्कार
मेजर ध्यानचंद के सम्मान में भारत सरकार देश के लिए खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानिल करती है। लंबे समय से उन्हें भारत रत्न देने की मांग की जा रही है। हालांकि, अब तक इस पर भारत सरकार का जवाब नहीं आया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें याद किया है और देशवासियों को खेल दिवस की बधाई दी है। उन्होंने लिखा- मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक बधाई। हाल के वर्ष खेलों के लिए बहुत अच्छे रहे हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहे। खेल पूरे भारत में लोकप्रियता हासिल करते रहें।

 
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