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School Dropout Rate: इन राज्यों में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर सबसे अधिक, रिपोर्ट में खुलासा

Sun, 11 Jun 2023 05:20 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

एक आंकड़ों के अनुसार गुजरात, बिहार, कर्नाटक, असम और पंजाब उन सात राज्यों में शामिल हैं, जहां माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर 2021-22 में 12.6 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक थी।
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student at school - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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एक आंकड़े के अनुसार गुजरात, बिहार, कर्नाटक, असम और पंजाब उन सात राज्यों में शामिल हैं, जहां माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर 2021-22 में 12.6 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। यह जानकारी 2023-24 के लिए "समग्र शिक्षा" कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के तहत आयोजित परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) की बैठकों के कार्यवृत्त से एकत्रित की गई थी। इस साल मार्च और मई के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठकें हुईं।

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इन राज्यों में ड्रॉपआउट दर

पीएबी बैठक के विवरण से पता चलता है कि 2021-22 में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर बिहार में 20.46 प्रतिशत, गुजरात में 17.85 प्रतिशत, असम में 20.3 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 16.7 प्रतिशत, पंजाब में 17.2 प्रतिशत थी। मेघालय में 21.7 फीसदी और कर्नाटक में 14.6 फीसदी है।

पश्चिम बंगाल में, हालांकि ड्रॉपआउट दर में 2020-21 से 2021-22 तक काफी सुधार हुआ है, विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर, इसे ड्रॉपआउट दर को कम करने और माध्यमिक स्तर पर प्रतिधारण दर में सुधार करने के लिए पर्याप्त उपाय जारी रखने की आवश्यकता है। केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे हैं। एक दस्तावेज में कहा गया है कि मुख्यधारा से बाहर के स्कूली बच्चों का विवरण PRABANDH पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश में, माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2020-21 में 23.8 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 10.1 प्रतिशत हो गई है, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है। राज्य हर साल एक मोबाइल ऐप की मदद से केंद्रित घरेलू सर्वेक्षण के साथ एक विशेष नामांकन अभियान चलाता है।

आंकड़ों से पता चला है कि महाराष्ट्र में, माध्यमिक स्तर पर वार्षिक औसत ड्रॉपआउट दर 2020-2021 में 11.2 प्रतिशत से घटकर 2021-2022 में 10.7 प्रतिशत हो गई थी। हालांकि, राज्य के पांच जिलों में ड्रॉपआउट दर 15 प्रतिशत और उससे अधिक है।

उत्तर प्रदेश में, बस्ती (23.3 प्रतिशत), बदायूं (19.1 प्रतिशत), इटावा (16.9 प्रतिशत), गाजीपुर (16.6 प्रतिशत), एटा (16.2 प्रतिशत) जिलों में वार्षिक औसत ड्रॉपआउट दर "बहुत अधिक" है। ), महोबा (15.6 प्रतिशत), हरदोई (15.6 प्रतिशत) और आजमगढ़ (15 प्रतिशत), एकत्रित आंकड़ों से पता चलता है।

राजस्थान में ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर अनुसूचित जनजातियों (नौ फीसदी) और मुस्लिम (18 फीसदी) बच्चों के बीच स्कूल छोड़ने की दर अभी भी "बहुत अधिक" है।
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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के पिछले साल के सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में 33 प्रतिशत लड़कियां घरेलू काम के कारण स्कूल छोड़ देती हैं। कई जगहों पर यह भी पाया गया कि बच्चे स्कूल छोड़ने के बाद अपने परिवार के साथ मजदूरी करने लगे या लोगों के घरों की सफाई करने लगे।
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