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Self Testing: खुद की परीक्षा लेना क्यों है जरूरी? प्रीटेस्टिंग से कैसे बनती है मजबूत याददाश्त और बेहतर सोच

Thu, 26 Jun 2025 05:11 PM IST
शिवम गर्ग बेनेडिक्ट कैरी, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

Francis Bacon Study Method: प्रीटेस्टिंग यानी खुद की परीक्षा लेना, न सिर्फ आपकी याददाश्त को मजबूत करता है, बल्कि बेहतर सोच और गहरी समझ भी विकसित करता है। जानें कैसे यह तकनीक परीक्षा की तैयारी को प्रभावशाली बनाती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Self Testing Benifits: अक्सर हममें से कई लोग परीक्षा का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं। पिछले बुरे अनुभवों, समय या आत्मविश्वास की कमी के चलते ऐसा होना लाजिमी भी है। याद रखें, किसी चीज की शुरुआत करने से पहले उससे संबंधित खुद की परीक्षा लेने से न सिर्फ शानदार परिणाम मिलते हैं, बल्कि चीजें लंबे समय तक याद भी रहती हैं? जरा सोचकर देखिए, अगर आपको किसी काम के पहले ही दिन उससे जुड़ी एक मुश्किल परीक्षा से गुजरना पड़े, भले ही आप इसमें असफल हो जाएं, तो? शोध बताते हैं कि ऐसा करने से आपके दिमाग को यह संकेत मिलता है कि आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है और किस दिशा में आगे बढ़ना है। इसे प्रीटेस्टिंग या पूर्वपरीक्षण कहा जाता है। इसके जरिये न सिर्फ पढ़ाई या परीक्षा की तैयारी की रूपरेखा बनाने में, बल्कि सही दिशा में बेहतर ढंग से आगे बढ़ने में भी मदद मिलती है।

प्रीटेस्टिंग के फायदे

प्रोटेस्टिंग से छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि परीक्षा के लिए क्या जरूरी है और किस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं। इससे छात्रों और शिक्षकों, दोनों को लाभ होता है। सबसे जरूरी बात यह है कि छात्र इससे यह सीखते हैं कि किसी विषय के बारे में कैसे और क्या सोचना है। वे अलग-अलग विचारों को जोड़कर एक ऐसी समझ बनाते हैं, जिससे उन्हें यह तय करने में मदद मिलती है कि क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं। इससे आलोचनात्मक सोच भी विकसित होती है, जिसे अन्य तरीकों से सीखने में काफी कठिनाई आती है।

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फ्रांसिस बेकन की सीख

समय-समय पर खुद की परीक्षा लेना सिर्फ यह जांचने के लिए नहीं होता है कि आप क्या जानते हैं, बल्कि यह पढ़ाई करने का भी एक दमदार तरीका है। 1620 में भी, दार्शनिक फ्रांसिस बेकन ने कहा था कि किसी पाठ को बीस बार पढ़ने के बजाय, उसे दस बार पढ़ना और बीच-बीच में उसे याद करने का अभ्यास करना बेहतर होता है। इस दौरान अगर आप कुछ भूल जाते हैं, तो उसे फिर से पढ़ें। इस तरीके से चीजों व तथ्यों को लंबे समय तक याद रखने में मदद मिलती है। कुछ पढ़ने या सौखने के तुरंत बाद उसका टेस्ट लेने से याददाश्त मजबूत होती है, भले ही आपने सिर्फ एक ही बार पढ़ा या सीखा हो।

नहीं भूलेंगे चीजें

कई बार आप अच्छी पढ़ाई करने के बाद भी परीक्षाओं में अच्छा नहीं कर पाते हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आप मान लेते हैं कि अगर कोई चीज अभी आसानी से याद हो रही है, तो वह हमेशा याद ही रहेगी। इसी को 'फ्लुएंसी इल्यूजन या प्रवाह भ्रम' कहते हैं। इसी कारण आपको लगता है कि एक बार कोई विषय समझ लिया, तो उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत नहीं है। इस सोच से बचें। बेशक, जब आप कुछ समय बाद उसी विषय या टॉपिक को फिर से पढ़ते हैं, तो यह थोड़ा उबाऊ लग सकता है, लेकिन इससे आपको अधिक प्रभावी ढंग से सीखने में मदद मिलती है। इसलिए, भले ही बार-बार पढ़ाई करना बोझिल और कम रुचिकर लगे, लेकिन यह चीजों को लंबे समय तक याद रखने में कारगर है।
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