सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को शारीरिक रूप से अक्षम एक मेडिकल प्रवेशार्थी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। उम्मीदवार को पश्चिम बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज में त्वचा विज्ञान के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इस आधार पर प्रवेश देने से इनकार कर दिया था कि स्टेट कोटे के तहत ऐसे उम्मीदवारों के लिए कोई आरक्षण नहीं है। इसे लेकर उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, यदि यह अदालत अंतिम समय में हस्तक्षेप करेगी, तो यह पहले से ही भर्ती हुए कुछ अन्य छात्रों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में हस्तक्षेप ठीक नहीं है। पीठ ने आवेदक से अगली बार तब आने को कहा जब वह इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगा।
छात्र ने याचिका में कहा कि पश्चिम बंगाल त्वचा विज्ञान पाठ्यक्रम के लिए पीजी प्रवेश में शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को प्रवेश में कोटा प्रदान नहीं करता है, इस तथ्य के बावजूद कि पीजी पाठ्यक्रमों में ऐसे छात्रों के लिए 27 सीटें आरक्षित हैं। याचिका में कहा गया है कि त्वचा विज्ञान पाठ्यक्रम में कोटा से इनकार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण था। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि यदि कोई छात्र अखिल भारतीय योग्यता सूची में आता है तो विकलांग छात्रों के लिए कोटा उपलब्ध है। किसी भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में में राज्य कोटे में शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है।