फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: यूपी के स्कूलों के वित्तीय स्थिति की जांच के लिए पैनल गठित, कोविड-19 में अधिक फीस का लगा आरोप

Wed, 19 Mar 2025 02:38 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UP Private Schools: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के 17 निजी स्कूलों के वित्तीय स्थिति की जांच के लिए दो सदस्यीय पैनल का गठन किया है। पैनल को यह तय करना है कि स्कूलों ने कोविड-19 महामारी के दौरान 15% अतिरिक्त फीस सही तरीके से वसूल की थी या नहीं। 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

UP Private Schools: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूपी के 17 निजी स्कूलों के वित्तीय स्थिति की जांच के लिए एक दो सदस्यीय पैनल का गठन किया है। यह पैनल इस बात का आकलन करेगा कि क्या इन स्कूलों ने कोविड-19 महामारी के दौरान अभिभावकों से 15% अतिरिक्त फीस वसूल की थी और अगर हां, तो क्या उसे समायोजित या वापस किया जाना चाहिए।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई की, जिसमें निजी स्कूलों को यह आदेश दिया गया था कि वे महामारी के दौरान ली गई 15% अतिरिक्त फीस को वापस करें या समायोजित करें।

पैनल का गठन और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सदस्यीय पैनल में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.पी. मित्तल और चार्टर्ड अकाउंटेंट आदिश मेहरा को शामिल किया गया है। यह पैनल स्कूलों के वित्तीय आंकड़ों का आकलन करेगा और यह जांचेगा कि क्या स्कूलों के पास अतिरिक्त फीस को वापस करने या समायोजित करने की क्षमता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इस मामले में प्रत्येक स्कूल की वित्तीय स्थिति की व्यक्तिगत जांच जरूरी है, क्योंकि हाईकोर्ट ने बहुत सामान्य दृष्टिकोण अपनाया था।" कोर्ट ने यह भी कहा कि कोर्ट के आदेश को लागू करते समय प्रत्येक स्कूल के वित्तीय आंकड़ों और स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को आदेश दिया था कि वे 2020-2021 के दौरान कोविड-19 महामारी के प्रभाव के चलते, जो 15% अतिरिक्त फीस वसूली गई थी, उसे समायोजित करें या अभिभावकों को वापस करें। हाईकोर्ट के आदेश में यह मान्यता दी गई थी कि महामारी के दौरान स्कूलों की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा था, लेकिन यह भी कहा गया था कि अतिरिक्त शुल्क की वापसी की प्रक्रिया सही तरीके से की जानी चाहिए।

और भी पढ़ें:- दिल्ली मेट्रो में चल रही है भर्ती, बिना परीक्षा के होगा चयन; 66 हजार तक मिलेगी सैलरी

स्कूलों का तर्क

इन 17 स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि महामारी के दौरान वे आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, जहां कर्मचारियों और शिक्षकों की सैलरी में कटौती की गई थी और कई स्कूलों ने आवश्यक खर्चों में भी कमी की थी। उन्होंने तर्क दिया कि हर स्कूल की स्थिति अलग है, और इस तरह के आदेश को लागू करते समय प्रत्येक स्कूल की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है।

पैनल द्वारा किए जाने वाले कार्य और रिपोर्ट की तारीख

इस पैनल को सभी स्कूलों के खातों का निरीक्षण करने और यह तय करने का जिम्मा सौंपा गया है कि क्या उन स्कूलों को अतिरिक्त फीस वापस करने की आवश्यकता है। पैनल को 4 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी, और इस पर अगली सुनवाई अगस्त 2025 के सप्ताह में होगी।

और भी पढ़ें:-  परीक्षा में नंबर ही सब कुछ नहीं होते... 12वीं में कम अंक होने के बाद भी आईपीएस बने दिनेश कुमार

पैनल के सदस्य और भुगतान

यह पैनल स्कूलों की वित्तीय स्थिति का आकलन करेगा और 3 सप्ताह के भीतर आवश्यक बिल और दस्तावेजों को पैनल के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। पैनल को प्रत्येक स्कूल के लिए 1 लाख रुपये और चार्टर्ड अकाउंटेंट को 75,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें