क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को आदेश दिया था कि वे 2020-2021 के दौरान कोविड-19 महामारी के प्रभाव के चलते, जो 15% अतिरिक्त फीस वसूली गई थी, उसे समायोजित करें या अभिभावकों को वापस करें। हाईकोर्ट के आदेश में यह मान्यता दी गई थी कि महामारी के दौरान स्कूलों की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा था, लेकिन यह भी कहा गया था कि अतिरिक्त शुल्क की वापसी की प्रक्रिया सही तरीके से की जानी चाहिए।
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स्कूलों का तर्क
इन 17 स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि महामारी के दौरान वे आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, जहां कर्मचारियों और शिक्षकों की सैलरी में कटौती की गई थी और कई स्कूलों ने आवश्यक खर्चों में भी कमी की थी। उन्होंने तर्क दिया कि हर स्कूल की स्थिति अलग है, और इस तरह के आदेश को लागू करते समय प्रत्येक स्कूल की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है।
पैनल द्वारा किए जाने वाले कार्य और रिपोर्ट की तारीख
इस पैनल को सभी स्कूलों के खातों का निरीक्षण करने और यह तय करने का जिम्मा सौंपा गया है कि क्या उन स्कूलों को अतिरिक्त फीस वापस करने की आवश्यकता है। पैनल को 4 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी, और इस पर अगली सुनवाई अगस्त 2025 के सप्ताह में होगी।
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पैनल के सदस्य और भुगतान
यह पैनल स्कूलों की वित्तीय स्थिति का आकलन करेगा और 3 सप्ताह के भीतर आवश्यक बिल और दस्तावेजों को पैनल के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। पैनल को प्रत्येक स्कूल के लिए 1 लाख रुपये और चार्टर्ड अकाउंटेंट को 75,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।