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Gujrat: त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए राज्यसभा में विधेयक पारित, लाखों लोग होंगे लाभांवित

Tue, 01 Apr 2025 09:07 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Gujrat: त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है। विश्वविद्यालय का नाम त्रिभुवनदास किशिभाई पटेल के नाम पर रखा गया है, जो भारत में सहकारी आंदोलन के अग्रदूतों में से एक थे।
 
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मंत्री मुरलीधर मोहोल - फोटो : X(@mohol_murlidhar)
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विस्तार
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Gujrat: राज्यसभा ने मंगलवार को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर चर्चा और पारित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें सहकारी समितियों के लिए योग्य जनशक्ति तैयार करने के लिए गुजरात के आनंद में 'त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय' स्थापित करने का प्रस्ताव है। विश्वविद्यालय का नाम त्रिभुवनदास किशीभाई पटेल के नाम पर रखा गया है, जो भारत में सहकारी आंदोलन के अग्रदूतों में से एक थे और अमूल की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

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पिछले सप्ताह लोकसभा द्वारा पारित इस विधेयक को सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने केंद्रीय सहकारिता और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उच्च सदन में पेश किया। 

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सहकारी क्षेत्र के विकास की दिशा में कदम

मंगलवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से "त्रिभुवन" सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पारित कर दिया। इस विधेयक पर हुई चर्चा में कुल 28 सदस्यों ने भाग लिया। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि देश की आधे से ज्यादा आबादी यानी 50% से अधिक लोग कृषि से जुड़े हैं। देशभर में करीब 8 लाख सहकारी संस्थान हैं, जिनसे लगभग 30 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।

मंत्री मोहोल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र का पहला विश्वविद्यालय होगा। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के कौशल विकास और दक्ष पेशेवरों के निर्माण की जरूरत को पूरा करना है।

लंबित मुद्दा होगा हल

इस विश्वविद्यालय का मकसद सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और बोर्ड सदस्यों का कौशल विकास करना है। लंबे समय से इस क्षेत्र में कर्मचारियों और पदाधिकारियों के प्रशिक्षण का मुद्दा लंबित था। अब इस विश्वविद्यालय के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर और केंद्रित तरीके से इसे हल किया जाएगा।

विधेयक में कहा गया है कि सहकारी समितियों में विभिन्न प्रकार की नौकरियों (प्रबंधकीय, पर्यवेक्षी, प्रशासनिक, तकनीकी और परिचालन) के लिए कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना आवश्यक है, जो शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के लिए एक व्यापक, एकीकृत और मानकीकृत ढांचा प्रदान करेगा।
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विधेयक का उद्देश्य

"त्रिभुवन" सहकारी विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के नए अवसर प्रदान करेगा। यह विश्वविद्यालय युवाओं का कौशल विकास करेगा और डिग्री कार्यक्रमों के साथ-साथ दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम भी शुरू करेगा। प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। साथ ही, यह डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में क्षेत्र-विशिष्ट 'उत्कृष्टता विद्यालय' बनेगा।

"त्रिभुवन" सहकारी विश्वविद्यालय नई पहलों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधनों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, भारत भर में 284 सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों को एकीकृत करेगा, मौजूदा केंद्रों की क्षमता बढ़ाएगा, देश भर में दीर्घकालिक सहकारी पाठ्यक्रमों को बढ़ाएगा और सहकारी क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली स्थापित करेगा।
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