रिपोर्ट तलब : सबकी जवाबदेही तय हो
हैदराबाद के ICFAI बिजनेस स्कूल (आईबीएस) के आठ छात्रों को रैगिंग और एक छात्र की पिटाई के मामले में गिरफ्तार किया गया था। मामले में वीडियो वायरल होने के बाद घटना ने सांप्रदायिक रंग ले लिया था। एनएचआरसी ने इस घटना में की गई कार्रवाई और यूजीसी के नियमों के अनुसार रैगिंग को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में संस्थान की प्रथम दृष्टया विफलता के कारणों के बारे में छह सप्ताह के भीतर तेलंगाना के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। वहीं तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक से आरोपियों और कॉलेज के कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी भी मांगी है। बयान में कहा गया कि उन्हें यह बताने के लिए भी कहा गया है कि क्या कॉलेज ने पीड़ित को निलंबित किया है और यदि हां, तो किन परिस्थितियों में?
यह भी पढ़ें :
Ragging in CMC Vellore: क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में उतरवाए कपड़े, अश्लील कृत्यों की नकल करवाई
सवाल : 2009 के कानून के बावजूद सुधार क्यों नहीं?
एनएचआरसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि 2009 में उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के खतरे को रोकने के लिए यूजीसी के नियमन के बावजूद कुछ भी सुधार नहीं हुआ है। यह देखा गया कि घटना को रोका जा सकता था यदि रैगिंग के शुरुआती संकेतों की पहचान करने और औचक निरीक्षण करने के लिए छात्रों की नियमित बातचीत और परामर्श जैसे उपायों को लागू किया जाता। रैगिंग पर अंकुश लगाने के उपाय पर राघवन समिति की सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी सचिव को भी नोटिस भेजा गया है।