मुलाकात में भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण से अवगत कराया। साथ ही आग्रह किया कि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर पदों के लिए अधिसूचित उम्मीदवारों की सूची को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और एक नई परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। बता दें कि राज्य पीडब्ल्यूडी में कनिष्ठ अभियंताओं के 150 पदों को भरने के लिए पिछले महीने परीक्षा हुई थी और इसका परिणाम शनिवार को घोषित किया गया था।
गोवा के पीडब्ल्यूडी मंत्री पर रिश्वतखोरी का आरोप
मोनसेराटे ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने मुख्यमंत्री को सूचित किया है कि राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री दीपक पौस्कर ने इन पदों के लिए प्रति उम्मीदवार 25-30 लाख रुपये रिश्वत लिए थे। मैंने मुख्यमंत्री से पूरी सूची वापस लेने और फिर से परीक्षा आयोजित करने को कहा है।" मोनसेराटे ने दावा कि वह उन उम्मीदवारों को साथ ला सकते हैं जिन्हें रिश्वत देने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी सभी रिक्तियों को एक कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भरा जाना चाहिए जो इस तरह की परीक्षाओं को निष्पक्ष रूप से आयोजित करने के लिए केंद्रीय निकाय के रूप में कार्य करे।
पीडब्ल्यूडी मंत्री दीपक पौस्कर ने नकारे आरोप
भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन करते हुए, गोवा के पीडब्ल्यूडी मंत्री दीपक पौस्कर ने कहा, परीक्षा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज, पणजी के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित की गई थी। हमारी कोई भूमिका नहीं थी।
पहले आप नेता भी लगाए थे आरोप
इससे पहले भी, आम आदमी पार्टी के नेता अमित पालेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग में चुने गए उम्मीदवारों में से 95 प्रतिशत सत्तारी तालुका और संखालिम विधानसभा क्षेत्र से थे। संयोग से सत्तारी का प्रतिनिधित्व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे और संखालिम विधानसभा का प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री करते हैं।