इंजीनियरिंग की घटती मांग और हजारों कॉलेज प्रबंधन द्वारा कैंपस शटडाउन की खबरों के बाद मोदी सरकार ने एआईसीटीई को इंजीनियरिंग की पढ़ाई में गुणवत्ता बढ़ाने, मार्केट डिमांड के आधार पर कोर्स, पाठ्यक्रम तैयार करने, ट्रेनिंग देने और कैंपस प्लेसमेंट में उद्योगों को शामिल करने पर फोकस किया। महज दो साल में इंजीनियरिंग पासआउट युवाओं के कैंपस प्लेसमेंट में सात फीसदी की बढ़ोतरी के ये बड़े कारण हैं।
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़ व दिल्ली के कॉलेजों में 50 से 60 फीसदी तक कैंपस प्लेसमेंट हुए हैं।
यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा में प्लेसमेंट सुधरा: शैक्षणिक सत्र 2016-17, 2017-18 और सत्र 2016-17 की तुलना करें, तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ में कैंपस प्लेसमेंट में सुधार देखने को मिला है। उत्तराखंड में शैक्षणिक सत्र 2016-17 में 31.59 फीसदी प्लेसमेंट हुए थे, जो 2017-18 में बढ़कर 44.73 फीसदी तक हो गए।
जम्मू कश्मीर में भी प्लेसमेंट में सुधार : अलगाववादी और आंतक के माहौल में भी जम्मू कश्मीर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कंपनियां प्लेसमेंट के लिए पहुंच रही हैं। शैक्षणिक सत्र 2016-17 में 22.88 फीसदी छात्रों को प्लेसमेंट मिला था। जबकि शैक्षणिक सत्र 2018-19 में यह आंकड़ा 26 फीसदी पार कर रहा है। पहले दस कॉलेज थे और अब इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 12 तक पहुंच गई है।
| राज्य |
2017-18 में प्लेसमेंट (%) |
2018-19 में प्लेसमेंट (%) |
| हरियाणा |
57.51 |
59.51 |
| उत्तराखंड |
47.73 |
57.31 |
| पंजाब |
42.94 |
52.15 |
| हिमाचल प्रदेश |
55.98 |
57 |
| उत्तर प्रदेश |
49 |
51 |
| चंडीगढ़ |
47 |
49 |
| दिल्ली |
50.66 |
53 |
इधर, दमन और दीव में शून्य प्लेसमेंट
दमन और दीव में एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज है। इसमें 180 सीटें हैं, लेकिन 93 छात्र पढ़ते हैं। शैक्षणिक सत्र 2018-19 में एक भी छात्र का कैंपस प्लेसमेंट नहीं हुआ है। जबकि नागालैंड में महज एक छात्र को रोजगार मिला है। नागालैंड में दो इंजीनियरिंग कॉलेजों में 540 सीटें हैं। एडमिशन सिर्फ 87 छात्रों ने लिया। यहां सत्र 2017-18 और 2016-17 में एक-एक छात्र का प्लेसमेंट हुआ था।