जिम्मेदारियों से भरा काम
फायर इंजीनियर का मुख्य काम इमारतों को इस तरह से डिजाइन करना होता है कि आग लगने पर नुकसान कम से कम हो। आग बुझाने के लिए जरूरी उपकरण और प्रणालियां विकसित करना, पुरानी संरचनाओं का निरीक्षण करना, संभावित खतरों का आकलन करना और आग लगने के जोखिमों को कम करने के लिए रणनीतियां बनाना भी इनके ही जिम्मे होता है।
कोर्स की विविधताएं
इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए आपके पास डिप्लोमा इन हेल्थ सेफ्टी एंड एन्वॉयरन्मेंट, डिप्लोमा इन फायर फाइटिंग, पीजी डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग, बीएससी इन फायर इंजीनियरिंग, फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट, रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग जैसे कोर्स के विकल्प मौजूद हैं।
छह माह से तीन वर्ष की अवधि तक के कोर्स
इनकी अवधि छह महीने से लेकर तीन साल तक है। कोर्स के दौरान स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पर्यावरण प्रबंधन के साथ-साथ किसी भी कुदरती या मानव निर्मित आपदा से बचाव की तकनीकी जानकारी से लेकर जान-माल की रक्षा के वैज्ञानिक फॉर्मूलों की जानकारी दी जाती है।
शैक्षणिक व शारीरिक योग्यता
फायर इंजीनियरिंग में डिग्री के साथ कुछ व्यक्तिगत योग्यताओं की भी जरूरत होती है। आपके अंदर साहस और धैर्य के साथ लीडरशिप का गुण और त्वरित फैसले लेने की क्षमता का होना बेहद जरूरी है। डिप्लोमा या डिग्री में दाखिले के लिए केमिस्ट्री के साथ फिजिक्स या गणित विषय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना अनिवार्य है। इसमें प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा आयोजित कराई जाती है।