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Pariksha Pe Charcha: मोदी बोले- फोन का पासकोड परिवार को बताएं, घर में नो गैजेट जोन बनाएं

Tue, 30 Jan 2024 05:35 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे बिस्तर पर जाने के 30 सेकंड में गहरी नींद में सो जाते हैं। उन्होंने कहा, जब आप जागें तो पूरी तरह जागें और सोयें तो गहरी नींद लें, हमें यह संतुलन बनाने आना चाहिए। इसके लिए एक दिनचर्या बनाएं, धूप में कुछ वक्त बिताएं और नींद जरूर पूरी लें।
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पीएम मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मार्टफोन से जुड़े कुछ नियमों का पालन विद्यार्थियों को करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, वे अपने स्मार्टफोन का पासकोड अपने परिवार को जरूर बताएं। घर में नो गैजेट जोन बनाएं। डिनर के समय फोन या गैजेट अपने पास न रखें। इससे परिवार के बीच पारदर्शिता और करीबी बढ़ेगी, तकनीक बोझ भी नहीं बनेगी। प्रधानमंत्री ने माना कि आज तकनीक का उपयोग सबके लिए जरूरी है, लेकिन इसके लिए अभिभावकों को नियम बनाने होंगे। पीएम से बातचीत के दौरान पुणे के एक अभिभावक चंद्रेश जैन ने तकनीक की विद्यार्थियों के जीवन में बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताई थी। झारखंड के रामगढ़ की पूजा श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया की वजह से बच्चों की एकाग्रता पर असर पड़ने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने करीब दो घंटे 10 मिनट तक छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों से बातचीत की।

तकनीक और विद्यार्थी जीवन के बीच संतुलन के बताए मंत्र

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मेधावी दोस्त बनाएं: पीएम ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि हमेशा खुद से ज्यादा मेधावी और मेहनती सहपाठी से मित्रता करें। मित्र से आपको प्रेरणा मिलनी चाहिए।
दबाव तीन प्रकार का: पहला साथियों का, दूसरा अभिभावकों का और तीसरा खुद बनाया हुआ। पीएम ने सुझाव दिया कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, तैयारियों को सुधारें। इस तरह परीक्षा से पहले वे पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।
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जैसे सर्दियों के लिए तैयार, वैसे ही परीक्षा के लिए भी: हमें खुद को हर तरह का दबाव सहने के योग्य बनाना चाहिए। जिस तरह ठंडी जगह पर हम सर्दियों के लिए मानसिक तौर पर तैयार होते हैं, वैसे ही परीक्षा के लिए भी खुद को तैयार करना चाहिए।
अभिभावक-शिक्षक मिलकर समाधान करें: पीएम ने कहा, विद्यार्थियों की चुनौतियों का समाधान अभिभावक और शिक्षक मिलकर निकालें। खासतौर पर शिक्षक और विद्यार्थियों में मजबूत संपर्क होना चाहिए।
विद्यार्थियों की समस्याएं भी जानें शिक्षक: शिक्षक सिलेबस से आगे बढ़कर विद्यार्थियों की छोटी-छोटी समस्याओं को भी जानें। शिक्षक का काम विद्यार्थी के जीवन को उच्च बनाना, जीने की शक्ति देना व इनके जरिये बदलाव लाना भी है।

मैं 30 सेकंड में सो जाता हूं, अनोखे नियम समझाए
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे बिस्तर पर जाने के 30 सेकंड में गहरी नींद में सो जाते हैं। उन्होंने कहा, जब आप जागें तो पूरी तरह जागें और सोयें तो गहरी नींद लें, हमें यह संतुलन बनाने आना चाहिए। इसके लिए एक दिनचर्या बनाएं, धूप में कुछ वक्त बिताएं और नींद जरूर पूरी लें। स्क्रीन पर बिताए समय की वजह से विद्यार्थियों की नींद का समय कम हो रहा है। जबकि नींद हमारे लिए बेहद जरूरी है। स्वस्थ जीवन शैली पर प्रधानमंत्री से राजस्थान के विद्यार्थी धीरज सुभाष, केंद्रीय विद्यालय की नजमा खातून, अरुणाचल प्रदेश से शिक्षक अभिषेक तिवारी ने सवाल किए थे।

स्मार्टफोन भी चार्ज करना होता है...नींद से समझौता न करें
फोन को भी चार्ज करना होता है। इसी तरह हमारे शरीर को भी री-चार्ज करने की जरूरत होती है। कुछ विद्यार्थी पूरे समय फोन पर खेलते रहते हैं। इसमें संतुलन होना चाहिए। रील देखने के लिए अपनी नींद का समय न गंवाएं। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है और अच्छी नींद अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री (विद्यार्थियों में स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल पर)

मैंने निराशा के सभी दरवाजे बंद किए, खिड़की भी खुली नहीं छोड़ी
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को अपने अनुभवों से भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा, चुनौती को चुनौती देना उनके स्वभाव में है। गरीबी खत्म करने पर किए कार्यों का उदाहरण देकर कहा, उन्होंने दूसरों की तरह बैठे रहकर इस चुनौती को देखते रहने के बजाय नए रास्ते निकालने पर जोर दिया। कुछ लोग मानते हैं कि संकट के समय इंतजार करने से परिस्थितियां सुधर जाएंगी। ऐसे लोग जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाते। पीएम ने कहा कि वे चुनौती से नई चीजें सीख अपनी रणनीति सुधारते हैं।

करोड़ों चुनौतियां हैं तो अरबों समाधान भी
कोविड महामारी के वक्त पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मुझे कभी नहीं लगा कि मैं सिर्फ एक अकेला 'चायवाला' हूं जो इसका प्रबंधन नहीं कर सकता, बल्कि विश्वास था कि देश के 140 करोड़ लोग मेरे साथ हैं। अगर 10 करोड़ चुनौतियां हैं तो अरबों समाधान भी हैं। कहा, आप जिसके लिए काम कर रहे हैं, उनमें आपका गहन विश्वास होना चाहिए।

हमने सामूहिक शक्ति बढ़ाई
प्रधानमंत्री ने कहा, महामारी के समय मैं कह सकता था कि हम क्या करें, यह महामारी है, कृपया खुद अपना ध्यान रखें, लेकिन ऐसा नहीं किया। बल्कि रोज टीवी पर आकर लोगों से बातचीत की, कभी ताली बजाने को कहा तो कभी थाली, कभी दीये जलवाए। इनसे कोरोना खत्म नहीं हुआ, लेकिन एक सामूहिक शक्ति ने जन्म लिया, जो कोविड से लड़ने में काम आई। उन्होंने कहा, मैंने निराशा के दरवाजे बंद कर दिए हैं, कोई खिड़की भी खुली नहीं छोड़ी है।

बच्चों-अभिभावकों में विश्वास की कमी गंभीर मामला
पुडुचेरी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा दीपश्री ने प्रधानमंत्री से प्रश्न किया कि विद्यार्थी अपने परिवार वालों को कैसे यकीन दिलाएं कि वे मेहनत कर रहे हैं? पीएम मोदी ने दोनों में विश्वास की कमी को गंभीर मामला बताया। कहा, इस कमी से पैदा हुई दूरी बच्चों को अवसाद की ओर ले जा सकती है। अविश्वास अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय में धीरे-धीरे आता है। विद्यार्थियों, अभिभावकों व शिक्षकों को गहन विचार करना चाहिए। विश्वास बढ़ाने के लिए आपस में ईमानदारी से बात करनी चाहिए।

विश्वास जताएं, शक न करें: पीएम मोदी ने कहा, विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में ईमानदार रहें। अभिभावक बच्चों में विश्वास जताएं, शक न करें। शिक्षक ऐसा माध्यम बन सकते हैं, जिनसे बच्चे खुला संवाद करें। माता-पिता अपने बच्चे के मित्रों के माता-पिता से भी मिला करें, और एक दूसरे के बच्चों की सकारात्मक बातों पर चर्चा करें।

कार्यक्रम में भागीदार विद्यार्थी गदगद: हिमाचल प्रदेश ऊना के जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा दिव्या शर्मा देश के उन 6 विद्यार्थियों में शामिल थीं, जिन्हें एंकर बनाया गया। दिव्या ने पीएम मोदी के साथ मंच साझा करना सौभाग्य बताया। कहा, यह उनके कॅरिअर के लिए बड़ा अवसर था। जी 20 समिट का आयोजन स्थल पर ही हुई परीक्षा पे चर्चा से भी सभी विद्यार्थी गदगद नजर आए। कई विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। विद्यार्थियों से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जी 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने इसी स्थान पर दुनिया के भविष्य पर विमर्श किया था और अब भारत के भविष्य और परीक्षा को लेकर विद्यार्थी चर्चा कर रहे हैं।

भावी पीढ़ियों को बेहतर शिक्षा देने और ऊंचा उठाने में मिलेगी मदद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विद्यार्थियों से बातचीत में कई गहरे सबक सामने आए। इनके जरिए युवा पीढ़ी परीक्षा के समय पेश आने वाली चुनौतियों से निपट सकेगी। मोदी जी के शब्द उनके लिए न केवल प्रेरक हैं, बल्कि तनाव प्रबंधन में भी मददगार साबित होंगे। इनके जरिए शिक्षक और अभिभावक भी मार्गदर्शन पा सकते हैं जिससे वे भविष्य की पीढ़ियों को बेहतर शिक्षा देने व ऊंचा उठाने में मदद करेंगे।

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