10वीं में एसटी वर्ग की बेटियों का पास फीसदी बढ़कर 119 हुआ
10वीं कक्षा में बेटियों की संख्या 2013 में 82.2 लाख थी, जो 2025 में 9.45 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 90 लाख दर्ज किया गया। इसमें एससी वर्ग में 14.75 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 14 लाख से 16 लाख और एसटी वर्ग में 81.33 फीसदी बढ़त के साथ आंकड़ा 4.1 लाख से 7.4 लाख तक पहुंच गया है। पास फीसदी की बात करें तो पिछले 11 साल में यह आंकड़ा 68.1 फीसदी है। इसमें एसटी वर्ग में 79.1 फीसदी और एसटी वर्ग में 118.8 फीसदी तक हो गया।
12वीं कक्षा में एससी वर्ग की बेटियों का पास फीसदी 252 फीसदी पहुंचा
उधर, बेटियां अब 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी कर रहीं। 2013 में 12वीं कक्षा में बेटियों की भागदारी 59.8 लाख थी, जो 2024 में 71.7 लाख तक पहुंच गई। यानी 19.8 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इसमें एससी वर्ग की बेटियों का आंकड़ा 27.8 फीसदी और एसटी वर्ग में 45 फीसदी तक बढ़ा है। एसटी वर्ग की बेटियों का पास फीसदी 252 फीसदी और एसटी वर्ग में 159 फीसदी तक पहुंच गया है।
बेटियों की पहली पसंद अब आर्ट्स नहीं साइंस
बेटियों की पहली पसंद अब आर्ट्स नहीं साइंस स्ट्रीम हो गई है। पिछले 11 साल में साइंस से पढ़ाई करने वाली बेटियों की संख्या 110 फीसदी बढ़ी है। इसमें भी एससी वर्ग में बेटियों की भागीदारी 142.2 फीसदी और एसटी वर्ग 149 फीसदी तक बढ़ी है।
10वीं में ड्रापआउट 47 फीसदी कम
दसवीं कक्षा में ड्रापआउट करीब 47 फीसदी तक कम हुआ है। अब 26.6 लाख छात्र दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे। इनमें से 4.43 लाख छात्र परीक्षा नहीं देते हैं। वहीं, 22.17 लाख छात्र अनुत्तीर्ण हो जाते हैं। वर्ष 2013 में ड्रापआउट का आंकड़ा 41.53 लाख था। वहीं, ओपन स्कूल में इस कक्षा में महज 6.98 फीसदी पंजीकृत और 3.4 लाख छात्र उत्तीर्ण हो रहे हैं।