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जेएनयू : गैर-जेआरएफ के लिए सीटें नहीं छोड़ने का मुद्दा, हाईकोर्ट ने कहा- पहले ही पूरी हो चुकी प्रवेश प्रक्रिया

Tue, 23 Nov 2021 05:37 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा इस तर्क पर किया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र वर्ष के लिए प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
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जेएनयू : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को शैक्षणिक वर्ष 2021 -22 में गैर-जेआरएफ उम्मीदवारों के लिए कोई सीट नहीं छोड़ने वाले जूनियर रिसर्च फेलोशिप श्रेणी के उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत पीएचडी सीटों के आवंटन के संबंध में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका का निपटारा किया।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा इस तर्क पर किया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र वर्ष के लिए प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। ऐसे में याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया। पीठ ने याचिकाकर्ता एसोसिएशन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यूनिट को किसी भी आवश्यकता के मामले में कानून के अनुसार उपयुक्त प्राधिकारी से संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। 

अधिवक्ता अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष के माध्यम से यह जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में दलील दी गई है कि पिछले वर्षों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सात केंद्रों में पीएचडी की सीटें जेआरएफ श्रेणी के अभ्यर्थियों के साथ-साथ गैर जेआरएफ अभ्यर्थियों से प्रवेश परीक्षा के आधार पर दोनों के माध्यम से भरी गई थीं, लेकिन चालू शैक्षणिक वर्ष 2021-22 में जेएनयू ने इस वर्ष 10 जून को जारी अपने ई-प्रॉस्पेक्टस के माध्यम से सात केंद्रों यानी सेंटर फॉर इंटरनेशनल ट्रेड एंड डेवलपमेंट में जेआरएफ श्रेणी के उम्मीदवारों के माध्यम से सभी प्रतिशत पीएचडी सीटें भरने का फैसला किया गया है। 
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस फैसले से इन सात केंद्रों में पीएचडी सीटों के खिलाफ आवेदन करने से गैर-जेआरएफ उम्मीदवार वंचित हो गए जो असंवैधानिक, मनमाना निर्णय है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।

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