नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया है कि देश के सभी जिला अस्पतालों को मेडिकल पढ़ाई के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इन अस्पतालों में मेडिकल की पढ़ाई होगी। इसके लिए विशेषज्ञों, योग्य शिक्षकों और पैसे की कमी नहीं होगी। चिकित्सा सेवा संस्थान और अस्पताल दोनों को काम करने से पहले मंजूरी लेनी होगी।
2022 के बाद पैराटीचर नहीं, सिर्फ नियमित शिक्षक रखे जाएंगे। केंद्र और राज्य खाली शिक्षकों के पदों को भरने की योजना बनाएंगे। हर पांच साल बाद इसका रिव्यू होगा कि कुल कितने शिक्षकों की जरूरत है, उसके आधार उनकी नियुक्ति व ट्रेनिंग का काम होगा। रिटायरमेंट से पहले खाली होने वाले पद पर शिक्षक की नियुक्ति हो जाएगी।
पूर्व छात्र संस्थान की कमियों से अच्छे से वाकिफ होंगे। स्थानीय लोग सुरक्षा, सफाई आदि में सहयोग करेंगे। पूर्व छात्रों का स्थानीय लोगों से पहले से परिचय होता है। ऐसे में जब दोनों मिलकर साथ आएंगे तो बदलाव तो दिखेगा ही।
बोर्ड परीक्षा और कॉलेज डिग्री लेने के बाद मार्केट में किस विषय की मांग रहेगी, क्या कोर्स सबसे अच्छा विकल्प है, इसकी जानकारी शिक्षण संस्थानों और स्थानीय उद्योगों के सामंजस्य से आसानी से उपलब्ध होगी। वे छात्रों को रोजगार से जोड़ने में सहयोग के साथ आर्थिक मदद भी देंगे।