शिक्षा में बदलाव के बीच दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसे शिक्षकों की जरूरत अधिक बढ़ी है, जो ऐसे विशेष बच्चों को शिक्षा देने के साथ उन्हें उनकी पसंद की चीज में निपुण बनाएं, ताकि उनकी जिंदगी आसान हो सके। ऐसे शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
लक्ष्य ये होगा कि ये शिक्षक विषय में पारंगत होने के साथ ऐसे बच्चों को रुचि के क्षेत्रों में तैयार कर सकें। चार साल के इंटीग्रेटेड बीएड वाले शिक्षकों को शिक्षा के साथ हर क्षेत्र में पारंगत बनाने का लक्ष्य होगा। 2030 तक शिक्षकों को शिक्षित करने की प्रणाली बहुत विशाल होगी।
अधिकतर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से बीएड-एमएड और पीएचडी की डिग्री मिल सकेगी। 2030 के बाद वही शिक्षक बन सकेंगे, जिनके पास कम से कम चार साल के इंटीग्रेटेड बीएड डिग्री होगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर शिक्षण कार्य का अनुभव रखने वाले और दो साल की बी.एड डिग्री वाले भी पात्र हो सकते हैं।