बोर्ड परीक्षा के तनाव और असफल छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर लगाम के लिए सेमेस्टर सिस्टम की तर्ज पर बोर्ड परीक्षा साल में दो बार कराई जा सकती है। इससे 10वीं और 12वीं के छात्रों को एक-एक साल के कोर्स की जगह केवल छह-छह महीने के कोर्स की परीक्षा देनी होगी। यह जल्द घोषित होने वाली नई शिक्षा नीति का अहम बिंदु है।
ये सिफारिश इसरो के पूर्व प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने नई शिक्षा नीति में की है। आज केंद्र और राज्य सरकारों के शिक्षा मंत्री इस शिक्षा नीति को अंतिम रूप देंगे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने साल में दो बार परीक्षा कराने के बारे में क्या कहा है, यह हम आपको आगे बता रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई शिक्षा नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए कैब की विशेष बैठक बुलाई गई है। इससे पहले जुलाई में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु समेत 25 राज्यों ने इस पर अपनी सहमति दी थी। हालांकि मसौदे पर कुछ आपत्तियों व देशभर से मिले करीब दो लाख सुझावों के आधार पर भी कुछ बदलाव किए गए हैं।
नई शिक्षा नीति में ये हैं समिति की अहम सिफारिशें