केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार, 27 जुलाई, 2021 को एनआरएफ यानी नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। एनआरएफ को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्थापित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2020 में नई शिक्षा नीति का मसौदा पेश करते वक्त तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने इसकी घोषणा की थी। अब नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसे आगे बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने इसका प्रस्ताव तैयार किया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनआरएफ की स्थापना का विचार भारत में अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। एनआरएफ को लेकर शोध क्षेत्र में एक शीर्ष संरचना के रूप में कार्य करने की उम्मीद की जा रही है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि एनआरएफ को प्रस्तावित करने का उद्देश्य यह है कि यह अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा और उद्योग के बीच संबंधों में सुधार करेगा। राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) का कुल प्रस्तावित खर्च पांच साल की अवधि में 50,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का भारत में अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन यानी एनआरएफ स्थापित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा, एनआरएफ का एक प्रमुख उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों, विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अनुसंधान को बढ़ावा देना, शोध तंत्र विकसित करना और रिसर्च सुविधा प्रदान करना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, भारत सरकार ने देश में अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और #AatmanirbharBharat बनाने के लिए 5 वर्षों की अवधि में 50,000 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के उद्देश्य
एनआरएफ के प्रमुख उद्देश्यों में से एक शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान सुविधाओं की शुरुआत, विकास और सुविधाएं प्रदान करना है। शैक्षणिक संस्थानों में उन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां अनुसंधान क्षमता अभी विकास के चरण में है। एनआरएफ का एक अन्य उद्देश्य उच्च प्रभाव, बड़े पैमाने पर, बड़े स्तर पर अन्वेषण, मल्टी इंस्टीट्यूशन, और अंतर संकाय एवं बहु-राष्ट्रीय परियोजनाओं को फंडिंग और समर्थन देना है। उपरोक्त सभी काम संबंधित मंत्रालयों, विभागों और अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं, खासकर उद्योग जगत के सहयोग से किए जाएंगे।