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NEET 2024: नीट यूजी ग्रेस मार्क्स की होगी जांच, जानिए रिजल्ट विवाद मामले में अब तक क्या-क्या हुआ

Sat, 08 Jun 2024 06:47 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NEET UG 2024: नीट यूजी परिणाम विवाद को बढ़ता देख एनटीए की ओर से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें सभी मुख्य आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया गया। इस मामले में अब तक क्या हुआ, इस बारे में नीचे विस्तार बताया गया है।
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NEET 2024 - फोटो : Amar ujala graphics
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विस्तार
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NEET UG Result Controversy: इस वर्ष आयोजित हुई देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर विवाद बढ़ रहा है। विवाद की शुरूआत परीक्षा के आयोजन से ही शुरू हो गई थी। पहले परीक्षा लीक के आरोप लगे और रिजल्ट आने के बाद उसमें गड़बड़ी के आरोप लगने शुरू हो गए। देशभर से परीक्षा को पुनः आयोजित करने की मांग उठ रही है।

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नीट यूजी परीक्षा का आयोजन 05 मई, 2024 को किया गया था, जिसके लिए देशभर में 557 व विदेशों के 14 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए। करीब 24 लाख छात्रों ने इस वर्ष परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा होने के बाद पेपर लीक के भी आरोप लगे। हालांकि, एनटीए ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि परीक्षा सुचारू रूप से शुरू हुई और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।

विवाद तेजी से तब बढ़ा जब, 4 जून को एनटीए ने नीट यूजी का रिजल्ट जारी किया। इस वर्ष रिकॉर्ड 67 उम्मीदवारों ने अखिल भारतीय रैंक - 1 हासिल की। रिजल्ट देखने के बाद कई अभ्यर्थियों ने अंकों में अनियमितता का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस अनियमितता के कारण ही शीर्ष 67 अभ्यर्थियों में एक ही केंद्र के 6 अभ्यर्थी शामिल हैं। यह आरोप अंकों में वृद्धि को लेकर लगाया गया।

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टॉपर्स की संख्या में वृद्धि क्यों हुई?

हालांकि, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया और कहा कि छात्रों के उच्च अंक प्राप्त करने के पीछे एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलाव और परीक्षा केंद्रों पर समय की बर्बादी के लिए दिए गए ग्रेस मार्क्स जैसे कुछ कारण हैं।

एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें इस मुद्दे पर एक अभ्यावेदन भी मिला, जिसके कारण एनटीए को उन सभी छात्रों को पांच अंक देने पड़े जिन्होंने दो विकल्पों में से एक को चिह्नित किया था। इस कारण से कुल 44 छात्रों के अंक 715 से बढ़कर 720 हो गए, जिसके परिणामस्वरूप टॉपर्स की संख्या में वृद्धि हुई।

कुछ अभ्यर्थियों को 718 और 719 अंक कैसे मिले?

नीट का पेपर 720 नंबर का होता है। हर सवाल चार नंबर का होता और गलत उत्तर पर एक अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है। कोई छात्र अगर सभी सवाल सही करता है तो उसके पूरे 720 में से 720 आते हैं और अगर एक सवाल छोड़ देता है तो उसके 716 अंक आएंगे। ऐसे में तर्क दिया गया कि किसी भी छात्र के 718 और 719 अंक आना असंभव है।

इसपर एनटीए की तरफ से कहा गया, "Loss of Time के क्राईटीरिया के आधार पर कंपेनसेटरी मार्क्स दिए गए हैं। इसलिए, उम्मीदवारों के अंक 718 या 719 भी हो सकते हैं।"

झज्जर के बहादुरगढ़ में क्या हुआ?

झज्जर के बहादुरगढ़ में नीट परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्रों पर परीक्षार्थियों को गलत पेपर आवंटित किए गए थे। विद्यार्थियों को एक नहीं, प्रश्न पत्र के दो सेट सॉल्व करने के लिए दिए गए। जब बच्चे एक पेपर को 30 से 40 मिनट तक सॉल्व कर चुके थे, तब वह पेपर लेकर सिर्फ दूसरा पेपर सॉल्व करने को कहा गया था। इसके चलते बच्चों की परीक्षा अच्छी नहीं हुई थी।

माना जा रहा है कि बहादुरगढ़ केंद्रों पर जिन बच्चों का समय दूसरा पेपर देने की वजह से खराब हुआ था, उनको एनटीए की तरफ से ग्रेस मार्क दिए गए हैं। कुछ बच्चों को तो 50 से 60 नंबर तक ग्रेस मार्क देने की बात सामने आई है, लेकिन एनटीए ने फिलहाल साफ नहीं किया है कि किस बच्चे को कितने ग्रेस मार्क दिए गए हैं और किस आधार पर ग्रेस मार्क दिए गए हैं।

एक ही सेंटर से 6 टॉपर कैसे निकले?

इसके जवाब में एनटी की ओर से कहा गया कि जिस सेंटर से 6 नीट टॉपर निकले हैं, वहां पर परीक्षा दे रहे स्टूडेंट्स के ओवरऑल एवरेज मार्क्स भी ज्यादा थे। यानी बच्चों की परफॉर्मेंस अन्य जगहों से बेहतर थी।

मामले की सीबीआई जांच की हुई मांग

देशभर से इस मुद्दे पर टिप्पणियां आ रही हैं। आईएमए जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क ने एनटीए को पत्र लिखा और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। पत्र में सभी छात्रों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए "पुन: परीक्षा" का भी अनुरोध किया गया। 

राजनेताओं और राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर कई राजनेताओं और राज्य सरकारों की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हुई।

महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने हुई नीट परीक्षा को तत्काल रद्द करने की मांग की। आरोप लगाया गया कि इसके नतीजों ने राज्य के छात्रों के साथ अन्याय किया है। महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा, "संभवतः पैसे लेकर नीट परीक्षा आयोजित की गई थी। परिणाम ऐसे हैं कि महाराष्ट्र का कोई भी छात्र राज्य के सरकारी या निजी कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश नहीं ले पाएगा।"

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी छात्रों की "वैध शिकायतों" का जांच के माध्यम से समाधान करने का आह्वान किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने भी नीट का विरोध करते हुए कहा कि प्रवेश परीक्षा सामाजिक न्याय और संघवाद के खिलाफ है।

एनटीए ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन

मामले को तूल पकड़ता देख आखिरकार एनटीए ने सभी सवालों के स्पष्टीकरण के लिए 08 जून (शनिवार) को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इसमें सभी मुख्य सवालों पर स्पष्टीकरण दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेन्स का आयोजन नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) नई दिल्ली कार्यालय में किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि 'गड़बड़ी का जो मामला बताया जा रहा है, वो सिर्फ 6 सेंटर्स और 1600 उम्मीदवारों तक सीमित है। हमने एक्सपर्ट कमेटी बनाकर समीक्षा की थी। फिर से एक नई अपर लेवल कमेटी बनाई गई है, जो पहले की कमेटी (ग्रीवांस रीड्रेसल कमेटी) की रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। समिति एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उसके बाद फैसला लिया जाएगा।'

ग्रेस मार्क्स से पास हुए सिर्फ 50% उम्मीदवार

शिक्षा सचिव ने कहा कि '1563 उम्मीदवारों को नीट में ग्रेस मार्क्स मिले। इनमें से 790 उम्मीदवार ग्रेस मार्क्स से क्वालिफाई हुए हैं। बाकी सभी के मार्क्स या तो निगेटिव में ही रहे या वो पास नहीं हो सके। ओवरऑल पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। ग्रेस मार्क्स अलग-अलग होता है। आंसरिंग एफिशिएंसी वगैरह के आधार पर।'

क्या नीट 2024 परीक्षा फिर से आयोजित होगी?

शिक्षा सचिव ने कहा है कि 'Loss of Time के मानदंड़ के आधार पर कंपेनसेटरी मार्क्स दिए गए हैं। मामला सिर्फ 6 सेंटर्स और 1600 बच्चों का है। कमेटी का जो भी फैसला होगा, वो उन्हीं के लिए लिया जाएगा। अन्य पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।'  हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस से ये भी संकेत दिए गए हैं किअगर नीट परीक्षा फिर से आयोजित होती है तो सभी केंद्रों पर नहीं होगी। ये सिर्फ 6 सेंटर्स के लिए आयोजित की जाएगी।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु

  • इस वर्ष करीब 24 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से सिर्फ 1,563 को ग्रेस मार्क्स मिले हैं।
  • 4750 सेंटर्स पर नीट यूजी एग्जाम हुआ था। इनमें से सिर्फ 6 सेंटर पर दिक्कत आई है। कमेटी बनाई गई है जो इसकी जांच करेगी और जो भी सिफारिशें आएंगी, उसपर निर्णय लिया जाएगा।
  • जिस सेंटर से 6 टॉपर निकले हैं, वहां पर परीक्षा दे रहे छात्रों के ओवरऑल एवरेज मार्क्स भी ज्यादा थे। यानी यहां पर परीक्षा देने वाले छात्रों की परफॉर्मेंस अन्य जगहों से बेहतर थी।
  • Loss of Time क्राईटीरिया के आधार पर ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं। स्टूडेंट्स को अलग-अलग ग्रेस अंक दिए गए हैं जो उनकी आंसर लिखने की क्षमता समेत अन्य कई फैक्टर्स के आधार पर निर्धारित किए गए।
  • जिन सेंटर्स पर गड़बड़ी हुई, उनपर एक्शन होगा, लेकिन मामला सिर्फ 1563 छात्रों और 6 सेंटर्स का है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाए जाएंगे, लेकिन पूरे देश में परीक्षा पर असर नहीं पड़ेगा।
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