समाचार पत्रों में कोचिंग सेंटर के विज्ञापनों की "अतिशयता" की ओर इशारा करते हुए चिंता व्यक्त की और छात्रों से अन्य क्षेत्रों में "लाभदायक" अवसरों की तलाश करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा, "...अब, मैं समाचार पत्रों में कोचिंग सेंटर के विज्ञापनों की समग्रता को देख रहा हूं... पेज एक, पेज दो, पेज तीन उन लड़के और लड़कियों के चेहरों से भरे हुए हैं जिन्होंने सफलता प्राप्त की है। उन्हीं चेहरों का इस्तेमाल कई संगठन कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "इन विज्ञापनों की भव्यता को देखिए, लागत, उस विज्ञापन का एक-एक पैसा उन युवा लड़के और लड़कियों से आया है जो अपने लिए भविष्य सुरक्षित करने की तलाश में हैं।" उपराष्ट्रपति ने युवाओं से अन्य क्षेत्रों में भी अवसरों की तलाश करने को कहा।
धनखड़ ने कहा, "समय आ गया है, हमें सिविल सेवा की आकर्षक नौकरियों के बंधन से बाहर आना चाहिए। हम जानते हैं कि अवसर सीमित हैं, लेकिन हमें दूर देखना होगा और देखना होगा कि अवसरों की अपार संभावनाएं हैं, जो कहीं अधिक आकर्षक हैं और आपको (राष्ट्र के लिए) बड़े पैमाने पर योगदान करने में सक्षम बनाती हैं।"
उन्होंने युवाओं से "स्वार्थ को देश के हित से ऊपर रखने वाली ताकतों" का विरोध करने और उन्हें बेअसर करने का भी आग्रह किया।"