एनसीपीसीआर ने कहा कि यह देखा गया है कि स्कूल रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान बच्चों को राखी या तिलक या मेहंदी लगाने की अनुमति नहीं देते हैं और उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से परेशान करते हैं। यह ध्यान दिया जा सकता है कि आरटीई अधिनियम, 2009 के धारा 17 के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड निषिद्ध है।
शीर्ष बाल अधिकार निकाय ने कहा, इसलिए, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि स्कूल ऐसी किसी भी प्रथा का पालन न करें जिससे बच्चों को शारीरिक दंड या भेदभाव का सामना करना पड़े।