छह घटक इकाइयों के साथ मिलकर करेगा काम
शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के मुताबिक, यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 3 के अंतर्गत यूजीसी की सिफारिश पर एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्रदान किया गया है। इस मान्यता के बाद अब एनसीईआरटी अपनी छह घटक इकाइयों के साथ मिलकर एक डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में कार्य करेगा।
एनसीईआरटी की इन इकाइयों में रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, अजमेर; नॉर्थ ईस्ट रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, शिलांग; रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, मैसूर; पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन तथा रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, भुवनेश्वर शामिल हैं। इस दर्जे के मिलने के बाद एनसीईआरटी अब एक उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करेगा और छात्रों को मान्यता प्राप्त डिग्रियां प्रदान करेगा।
जनवरी में समिति ने की थी सिफारिश
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसी वर्ष जनवरी में यूजीसी ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिसमें एनसीईआरटी को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने की अनुशंसा की गई थी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एनसीईआरटी और उसके क्षेत्रीय संस्थानों को सभी निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही यह दर्जा प्रदान किया गया है। जारी अधिसूचना में संस्थान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अनुसंधान कार्यक्रम, डॉक्टोरल अध्ययन और नवाचार आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब तीन वर्ष का समय लगा। इसकी शुरुआत यूजीसी पोर्टल पर एनसीईआरटी द्वारा आवेदन जमा करने के साथ हुई थी। इसके बाद अगस्त 2023 में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया। नवंबर 2025 में एनसीईआरटी ने अनुपालन रिपोर्ट यूजीसी को सौंपी, जिसे विशेषज्ञ समिति ने स्वीकृति दी। अब शिक्षा मंत्रालय की अधिसूचना के बाद संस्थान आधिकारिक रूप से डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के पाठ्यक्रम संचालित कर सकेगा।