संस्थानों को सटीक और पूर्ण डाटा देने के निर्देश
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थान व्यापक और सटीक जानकारी जमा करें। इसमें सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) से जुड़ा डाटा भी शामिल होना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की सही और बेहतर प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।
आयोग ने यह भी कहा है कि समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए, क्योंकि यही डाटा वैश्विक रैंकिंग में संस्थानों की स्थिति और पहचान तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्यूएस एशिया/विषय रैंकिंग 2026 में भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन
हाल ही में जारी क्यूएस रैंकिंग में भारत के कई प्रमुख संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी श्रेणी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली 36वें स्थान के साथ देश का शीर्ष संस्थान रहा। इसके बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे 42वें और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास 62वें स्थान पर रहे। वहीं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर 64वें और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर 84वें स्थान पर रहे।
आर्ट्स, साइंस और अन्य क्षेत्रों में रैंकिंग
आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज में दिल्ली विश्वविद्यालय 231वें और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय 260वें स्थान पर रहे। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी 323वें स्थान पर रही।
लाइफ साइंस और मेडिसिन में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान 217वें स्थान पर रहा। नेचुरल साइंस में आईआईटी बॉम्बे (78), आईआईटी दिल्ली (91) और भारतीय विज्ञान संस्थान 125वें स्थान पर रहे।
सोशल साइंस और मैनेजमेंट में भी बेहतर प्रदर्शन
सोशल साइंस और मैनेजमेंट श्रेणी में भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद 66वें स्थान पर रहा। इसके बाद आईआईटी दिल्ली (84), आईआईटी बॉम्बे (105), दिल्ली विश्वविद्यालय (177) और भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता 178वें स्थान पर रहे।
यूजीसी ने सभी संस्थानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय के भीतर डाटा जमा कर भारत की वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति को और मजबूत बनाने में योगदान दें।