नई गणित की पढ़ाई में क्या बदलेगा?
9वीं कक्षा की गणित की नई किताब को नए पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें छात्रों को केवल सवाल का उत्तर निकालना नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि यह समझने पर भी जोर रहेगा कि किसी सवाल को हल करने के पीछे तर्क क्या है।
नए गणित पाठ्यक्रम में इन बातों पर खास जोर दिया गया है:
- कंप्यूटेशनल थिंकिंग यानी किसी समस्या को व्यवस्थित तरीके से समझने और हल करने की सोच
- समस्या समाधान
- गणितीय तर्क
- वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरण
इसका उद्देश्य छात्रों की ऐसी समझ विकसित करना है, जिससे वे किसी समस्या को केवल पहले से तय तरीके से हल करने तक सीमित न रहें। वे उसके पीछे का तर्क समझें और जरूरत के अनुसार अलग-अलग तरीकों से समाधान खोज सकें।
पुरानी और नई गणित की किताब में क्या अंतर है?
नई किताब में विषयों को रखने का तरीका भी बदला गया है। पहले के एनसीईआरटी ढांचे में 14 इकाइयां थीं। नए पाठ्यक्रम में 15 थीम रखी गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, विषयों की संख्या और क्रम में यह बदलाव टॉपिक्स की नई सीक्वेंसिंग और पुनर्गठन के लिए किया गया है। यानी विषयों को पढ़ाने और आपस में जोड़ने के तरीके में बदलाव किया गया है, ताकि छात्रों को गणित की अवधारणाओं को समझने में आसानी हो।
गणित की पढ़ाई में भारतीय परंपरा को कैसे जोड़ा गया?
नई पाठ्यपुस्तक में भारतीय गणितीय परंपरा को भी जगह दी गई है। इसके तहत प्रमुख भारतीय गणितज्ञों और गणित के क्षेत्र में उनके योगदान को संबंधित विषयों और अध्यायों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे छात्रों को केवल गणित की अवधारणाएं समझने का ही अवसर नहीं मिलेगा। वे भारत की गणितीय विरासत के बारे में भी जान सकेंगे।
कक्षा 9 की नई किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूली शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 के तहत बदले गए पाठ्यक्रम ढांचे के अनुसार तैयार की गई हैं।
एनसीईआरटी के अनुसार, इन नई किताबों को छात्रों की बदलती सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। साथ ही, इनका उद्देश्य स्कूलों को पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों को लागू करने में मदद करना भी है।