एनसीईआरटी की सफाई, कहा- झूठा है कांग्रेस का दावा
विपक्ष ने बिना किसी अधिसूचना के एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों से कुछ संदर्भों और विषयों को चुपचाप हटा दिए जाने का दावा करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर पाठ्यक्रम में प्रतिशोध के साथ लीपापोती करने का आरोप लगाया था। इसे लेकर अब नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने कहा है कि स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद के संदर्भ में कक्षा 11वीं की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से 2013 में ही हटा दिया गया था। एनसीईआरटी ने जोर देकर कहा कि इसे पिछले साल किए गए सिलेबस रेश्नालाइजेशन प्रैक्टिस से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
2013 में केंद्र की सत्ता पर काबिज थी कांग्रेस
2013 में केंद्र में सत्ता में रही कांग्रेस ने एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक से आजाद के संदर्भों को हटाने को लेकर पिछले हफ्ते सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह इतिहास को फिर से लिखने और झूठ पर बनी विकृत विरासत को प्रचारित करने का प्रयास है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा था, कितना अपमान है। मुझे ऐतिहासिक आख्यान में उपेक्षित आंकड़ों को जोड़ने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लोगों को हटाना, विशेष रूप से गलत कारणों से, हमारे विविध लोकतंत्र और इसके गौरवपूर्ण इतिहास के लिए अयोग्य है।
अक्तूबर 2013 में छपाई के लिए गई थी पुस्तकें
इसके बाद एनसीईआरटी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि पाठ्यपुस्तक के पिछले संस्करणों में मामले की खोज करते समय, यह पाया गया कि 2014-15 के बाद से मौलाना आजाद का नाम संदर्भित पैरा में नहीं था। प्रकाशन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार सत्र 2014-15 के लिए इस पाठ्यपुस्तक को अक्तूबर 2013 में छपाई के लिए अंतिम रूप दिया गया था। इसे वर्तमान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या तब बदलाव को अधिसूचित किया गया था तो अधिकारी ने कहा कि यह एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के पुनर्मुद्रण के नियमित अभ्यास के रूप में किया गया था जिसमें जानकारी को अपडेट करना और सही करना शामिल है।