संविधान सभा समिति की बैठकों की अध्यक्षता से हटा नाम
कक्षा 11वीं की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के पहले अध्याय, जिसका शीर्षक 'संविधान - क्यों और कैसे' है, में संविधान सभा समिति की बैठकों से जुड़ी एक पंक्ति को संशोधित करते हुए मौलाना आजाद का नाम हटाया गया है। संशोधित पंक्ति में अब बचा है कि आमतौर पर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल या डॉ आंबेडकर इन समितियों की अध्यक्षता करते थे। इस पंक्ति में पहले मौलाना अबुल कलाम आजाद का भी नाम आता था।
अनुच्छेद-370 का उल्लेख वाले चैप्टर में भी बदलाव
इसी पाठ्यपुस्तक के 10वें अध्याय में, संविधान का दर्शन शीर्षक से, जम्मू-कश्मीर के सशर्त विलय का संदर्भ भी हटा दिया गया है। उदाहरण के लिए, हटाए गए पैराग्राफ में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर का भारतीय संघ में विलय संविधान के अनुच्छेद-370 के तहत अपनी स्वायत्तता पर आधारित था। इससे पहले पिछले साल, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 2009 में शुरू की गई मौलाना आजाद फैलोशिप को बंद कर दिया था और छह अधिसूचित अल्पसंख्यकों के छात्रों को पांच साल के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की थी।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, बताया शर्मनाक
वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अंशुल अविजीत ने कहा कि यह सरकार द्वारा इतिहास को फिर से लिखने और नई पीढ़ी के लिए झूठी, विकृत विरासत थोपने का प्रयास है। अविजीत ने कहा कि मैं कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता हूं। मौलाना आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे और इस विडंबना को देखिए कि जिस शिक्षा मंत्री ने 14 साल से कम उम्र के लोगों के लिए एक सार्वभौमिक अनिवार्य शिक्षा की नींव रखी, किताबों से उनका नाम ही हटा दिया गया है। यह बिल्कुल शर्मनाक है।
सिलेबस रेशनलाइजेशन के दौरान हुई काट-छांट : सकलानी
एनसीईआरटी ने पिछले साल अपने सिलेबस रेशनलाइजेशन के रूप में ओवरलैपिंग और अप्रासंगिक कारणों का हवाला देते हुए इसकी पाठ्यपुस्तकों से कुछ हिस्सों को हटा दिया, जिसमें गुजरात दंगों, मुगल अदालतों, आपातकाल, शीत युद्ध, नक्सली आंदोलन के सबक आदि प्रसंग और संदर्भ शामिल थे। युक्तिकरण नोट में कक्षा 11वीं की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में किसी भी बदलाव का कोई उल्लेख नहीं था। हालांकि, एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने दावा किया है कि इस साल पाठ्यक्रम में कोई कटौती नहीं की गई है और पिछले साल जून में पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाया गया था।