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नई शिक्षा नीति का लक्ष्य समानता वाला समाज बनाना है: कस्तूरीरंगन

Thu, 17 Dec 2020 08:44 PM IST
संजीव कुमार झा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Krishnaswamy Kasturirangan - फोटो : social media
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉक्टर के.कस्तूरीरंगन ने गुरुवार को कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति का दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन को छुए और न्यायपूर्ण तथा समानता भरे समाज की स्थापना करे।

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सिमबॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 17वें दीक्षांत समारोह में कस्तूरीरंगन ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत की नई शिक्षा प्रणाली इस दृष्टिकोण से तैयार की गई है कि वह सुनिश्चित रूप से प्रत्येक नागरिक के जीवन को छुए, उनकी जरुरतों के हिसाब से हो और एक न्यायपूर्ण तथा समानता भरे समाज की स्थापना करे।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय और एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉक्टर कस्तूरीरंगन ने कहा कि इसका लक्ष्य भारत के नैतिक मूल्यों के जड़ों से जुड़े रहते हुए 21वीं सदी की आकांक्षाओं के अनुरुप नई प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिस ‘उदारवादी शिक्षा’ की बात की जा रही है उसका मूल करीब 1,400 साल पुरानी भारत की उदारवादी कला में है।
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 समारोह के दौरान पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ ए. पूनावाला को संस्थान की ओर से मानद डीलिट की उपाधि दी गई।

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