मराठी भाषा के संरक्षण और शिवाजी महाराज के इतिहास पर सरकार का विशेष जोर
चिंताओं का जवाब देते हुए, भुसे ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार मराठी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में एक विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें सभी स्कूलों में मराठी की अनिवार्य शिक्षा की समीक्षा की जाएगी।"
मंत्री ने कहा, "यदि निरीक्षण के दौरान कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित स्कूलों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
भुसे ने स्कूली किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को शामिल करने के बारे में भी बात की और बताया कि इसे काफी बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि जहां पहले दूसरे एजुकेशन बोर्ड की किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सिर्फ डेढ़ कॉलम ही होता था, वहीं अब केंद्र सरकार की मंजूरी से इसे बढ़ाकर 22 पेज का कर दिया गया है, जिससे छात्र मराठा शासक के जीवन और उनके योगदान को बेहतर ढंग से समझ सकें।
मंत्री ने फिर से कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा को मजबूत करने और यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि छात्र छत्रपति शिवाजी महाराज की शानदार विरासत के बारे में जानें।
CBSE की नई भाषा नीति के बीच महाराष्ट्र ने मराठी शिक्षा पर सख्ती बढ़ाई
भुसे ने कहा कि सभी स्कूलों को नए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। यदि कोई स्कूल मराठी भाषा को अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ाता है या नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब CBSE ने देशभर के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना की घोषणा की है। हालांकि, CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। वहीं, अभी 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।
CBSE के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, उन्हें अब इनके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। बोर्ड ने यह भी आश्वासन दिया है कि नई व्यवस्था के लिए जरूरी अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।