वहीं, वनजा और 40 अन्य की अन्य याचिका में इस साल 11 जुलाई के एक आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, क्योंकि इसने 14 और 15 जुलाई को माध्यमिक ग्रेड शिक्षक के पद से बीटी सहायक के पद के लिए होने वाली पदोन्नति काउंसलिंग को स्थगित कर दिया था। इसने अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर काउंसलिंग आयोजित करने की मांग की थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
योग्यता हासिल करने के लिए नौ साल का समय दिया गया था
न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE ACT) की धारा 23 (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत शैक्षणिक प्राधिकरण यानी एनसीटीई पहली कक्षा से आठवीं तक के लिए शिक्षकों की भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करता है। इससे अधिनियम की धारा 23 में स्पष्ट है कि एक शिक्षक, जिसके पास अधिनियम के प्रारंभ में न्यूनतम योग्यता अर्थात टीईटी में उत्तीर्ण नहीं है, उसे पांच वर्ष के भीतर टीईटी क्वालिफाई कर लेना चाहिए। आरटीई अधिनियम 2009 के तहत पहले से नियुक्त किए गए उम्मीदवारों को टीईटी पास करने के लिए शुरू में पांच साल और एक अप्रैल 2015 से चार साल का अतिरिक्त समय दिया गया है। इसलिए, अब इसमें समझौता करने की गुंजाइंश नहीं है।