परीक्षा में बैठने के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य
विधि संकाय के इस पक्षपात पूर्ण रवैये के कारण छात्र परेशान हैं। इस कारण से वह दो दिन से प्रदर्शन पर बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि विधि संकाय की अधिष्ठाता तत्काल इस्तीफा दें या सभी 300 छात्रों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दें। विधि संकाय के तीनों सेंटर (कैंपस लॉ सेंटर, लॉ सेंटर-1, लॉ सेंटर-2) से करीब 300 छात्रों की कम उपस्थिति के कारण परीक्षा देने से रोका गया है। इनमें से कई छात्र ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति 40 से 60 फीसदी तक है। परीक्षा में बैठने के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है।
एबीवीपी ने कार्रवाई को बताया छात्र विरोधी एवं पक्षपातपूर्ण
एबीवीपी दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने आरोप लगाया कि डूसू अध्यक्ष रौनक खत्री की अप्रैल तक की उपस्थिति 47 फीसदी है, लेकिन उन्हें विधि संकाय की डीन ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए परीक्षा देने की अनुमति दी है। डीन चाहें तो अन्य छात्रों को भी राहत दे सकती हैं। एबीवीपी ने परीक्षा से केवल तीन दिन पूर्व परीक्षा दिए जाने से रोकने की कार्रवाई को छात्र विरोधी एवं पक्षपातपूर्ण कहा है।
डूसू अध्यक्ष रौनक खत्री को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर बवाल
एबीवीपी ने सवाल उठाया कि जब अन्य छात्रों को उपस्थिति का बहाना बनाकर परीक्षा से वंचित किया गया तो डूसू अध्यक्ष रौनक खत्री को अनिवार्य उपस्थिति पूर्ण न होने के बावजूद किस आधार पर प्रवेश पत्र जारी किया गया। एबीवीपी ने इस मामले पर विधि संकाय की डीन से तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की है। इस कार्रवाई के विरोध में एबीवीपी के कार्यकर्ता 26 मई से धरने पर बैठे हैं।