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Narayana Murthy: आईआईटी में प्रवेश के लिए कोटा नहीं गोल्डन चांस, कोचिंग व्यवस्था भी गलत; बोले नारायण मूर्ति

Wed, 11 Sep 2024 03:05 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Narayana Murthy: इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने कोचिंग व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने कहा शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य रटकर परीक्षा की तैयारी करना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना है।
 
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Narayana Murthy, इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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Narayana Murthy: बेंगलुरु में पॉल हेविट के कॉन्सेप्चुअल फिजिक्स के 13वें संस्करण के शुभारंभ के अवसर पर इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने शिक्षा में कोचिंग व्यवस्था की आलोचना की। उनका मानना है कि कोचिंग कक्षाएं छात्रों के लिए परीक्षा पास करने का सही तरीका नहीं है। मूर्ति ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से कहा, "कोचिंग कक्षाएं बच्चों को परीक्षा पास करने में मदद करने का गलत तरीका है।" 

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नारायण मूर्ति ने कहा कि केवल उन्हीं छात्रों को कोचिंग की जरूरत महसूस होती है जो नियमित स्कूली कक्षाओं में ध्यान नहीं दे पाते हैं। उनके लिए शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य रटकर परीक्षा की तैयारी करना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना है।

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कोटा को लेकर मूर्ति ने कही ये बात

मूर्ति ने कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता पर बात की, विशेष रूप से कोटा जैसे शहरों में, जो अपने उच्च दबाव वाले वातावरण के लिए जाना जाता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या कोचिंग संस्थान आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं, तो मूर्ति ने सीधे-सीधे जवाब दिया। 

उन्होंने कहा, "कोचिंग कक्षाओं में जाने वाले ज्यादातर लोग स्कूल में अपने शिक्षकों की बात ध्यान से नहीं सुनते। और माता-पिता, जो अक्सर अपने बच्चों की पढ़ाई में मदद करने में असमर्थ होते हैं, कोचिंग सेंटर को ही एकमात्र समाधान मानते हैं।"

मूर्ति ने तेजी से बढ़ते कोचिंग उद्योग के बारे में चिंता व्यक्त की, जो सालाना 58,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और हर साल 19-20% की दर से बढ़ रहा है। जबकि यह वृद्धि बढ़ती मांग को दर्शाती है, मूर्ति ने तर्क दिया कि यह भारत की शिक्षा प्रणाली में एक गहरी समस्या की ओर इशारा करता है, जहां रटने की आदत अक्सर वास्तविक सीखने पर हावी हो जाती है। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का ध्यान अवलोकन, विश्लेषण और परिकल्पना परीक्षण पर होना चाहिए - ये कौशल वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। मूर्ति ने टिप्पणी की, "शिक्षा का उद्देश्य यह सीखना है कि कैसे सीखना है", उन्होंने दोहराया कि समझ और आलोचनात्मक सोच, न कि रटना, बच्चे की शिक्षा का मूल होना चाहिए।

उन्होंने आगे अपने विचार साझा किए कि शिक्षा के प्रति यह दृष्टिकोण किस तरह नवाचार को बढ़ावा दे सकता है। मूर्ति ने 1993 में इंफोसिस में एक कार्यशाला को याद किया, जहां एक चपरासी ने उनसे पूछा कि नवाचार का सही अर्थ क्या है। मूर्ति का जवाब सरल लेकिन प्रभावशाली था: "नवाचार का मतलब है चीजों को पहले से जयादा तेजी से, सस्ते में और बेहतर गुणवत्ता के साथ करना। चाहे आप टेबल साफ कर रहे हों या जटिल समस्याओं को हल कर रहे हों, इसका मतलब है हर दिन सुधार करना।" 
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