खान ने संवाददाताओं से कहा कि यूजीसी के नियम इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं कि राज्यपाल विश्वविद्यालयों के पदेन चांसलर हैं। राज्यपाल ने कहा कि कुछ भी... कोई भी प्रावधान, चाहे वे कोई भी बिल पास करें, अगर यह यूजीसी के नियमों के खिलाफ है, तो यह कानून नहीं बन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह का कदम उठा रही है क्योंकि वे पूरी तरह से निराश एवं हताश है। खान ने कहा कि अगर कोई उस प्रणाली के नियमों से साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है .. जो यूजीसी के नियमों के खिलाफ होगा। इसलिए, आप इन चीजों के बारे में चिंता न करें। वे अपनी हताशा निकाल रहे हैं। वे पूरी तरह से निराश महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कानून बहुत स्पष्ट है- विश्वविद्यालय कुलाधिपति की जिम्मेदारी है, सरकार की नहीं। विश्वविद्यालय पर कानूनी रूप से बोलना, आपकी जिम्मेदारी नहीं है। आप हर रोज विश्वविद्यालय के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। हालांकि, कुलाधिपति के पास विधि शक्ति है लेकिन मेरा विचार विश्वविद्यालय है... विश्वविद्यालय चलाने का काम कुलाधिपति का नहीं है। यह कुलपति का काम है। खान ने कहा कि कुलाधिपति का काम यह सुनिश्चित करना है कि विश्वविद्यालय के कामकाज में न तो कार्यपालिका से और न ही कहीं से कोई हस्तक्षेप हो।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का सम्मान किया जाता है। उनका यह बयान मुख्यमंत्री पी विजयन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के एक दिन बाद आया है, जिसमें राज्य के 14 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के नियमों में आवश्यक संशोधन करने का फैसला किया गया था ताकि राज्यपाल को प्रख्यात शिक्षाविदों के साथ बदल दिया जा सके।