कॉलेज प्राचार्य डॉ. लिनेट जे मॉरिस ने बताया कि छात्राओं को ऑपरेशन थिएटर की पोशाक बदलने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों के बारे में बताया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि इस मामले पर अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी।
छात्राओं ने सोमवार को प्रिंसिपल से अपने अनुरोध में कहा कि उनकी मजहबी मान्यता के अनुसार उन्हें हमेशा हिजाब पहनना होगा। इसलिए उन्हें अपनी मजहबी आस्था के साथ-साथ अस्पताल के नियमों का पालन करने वाली यूनिफॉर्म पहनने के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने रिक्वेस्ट में कहा कि लंबी आस्तीन वाले स्क्रब जैकेट और सर्जिकल हुड उन्हें अस्पताल और पांरपरिक पोशाक में साथ-साथ संतुलन बनाए रखने की अनुमति दी जाए।
डॉ. मॉरिस ने कहा कि ऑपरेशन थिएटरों में पोशाक विभिन्न तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार तय की गई थी। इसलिए पोशाक में कोई भी बदलाव विस्तृत चर्चा और परामर्श के बाद ही किया जा सकता है। पिछले साल केरल सरकार ने छात्र पुलिस कैडेट परियोजना की वर्दी के हिस्से के रूप में हिजाब और पूरी आस्तीन की अनुमति देने की एक स्कूली छात्र की याचिका को खारिज कर दिया था।