1945 में वेलेंटीना ने आठ साल की उम्र में स्कूल में दाखिला लिया। लेकिन पैसों की तंगी की वजह से वेलेंटीना ने 1953 में स्कूल छोड़ कॉरस्पॉडेंस कोर्स के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखी और नौकरी करने लगी। तेरेश्कोवा ने 22 वर्ष की उम्र में ही पैराशूटिंग में रुचि विकसित कर ली थी और स्थानीय एरोक्लब में स्काइडाइविंग में प्रशिक्षण लिया था।
अब तक 126 बार पैराशूट से छलांग लगाने की वजह से वेलेंटीना काफी मशहूर हो चुकी थीं। इसलिए 1961 में अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के लिए वेलेंटीना को चुना गया। इसके अलावा 400 से भी ज्यादा महिलाओं में 4 अन्य महिलाओं को भी इस मिशन के लिए चयनित किया गया। बता दें कि यूरी गगारिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद, सोवियत सरकार महिलाओं को अंतरिक्ष में भेजना चाहता था ताकि इतिहास में अंतरिक्ष में भेजी जाने वाली पहली महिला का नाम सोवियत संघ के नाम पर दर्ज हो।
सोवियत सरकार ने 18 महीनों तक सभी महिलाओं को अंतरिक्ष यात्रा की बारीकियों के बारे में सिखाया। जिसमें से वेलेंटीना को वोस्तोक-6 के पायलट के रूप में लिए चुना गया। कॉस्मोनॉट वालेरी ब्यकोवस्की ने 14 जून, 1963 को वोस्तोक 5 पर उड़ान भरी और दो दिन बाद, तेरेश्कोवा ने भी उड़ान भरी।अंतरिक्ष के 48 चक्कर लगाने और 70 घंटे से अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद वेलेंटीना 19 जून 1963 को पर लौटीं। उन्होंने सफलतापूर्वक 20,000 फीट की ऊंचाई से जंप किया और पैराशूट की मदद से धरती पर कदम रखा। वेलेंटीना ने मात्र 26 वर्ष की आयु में सफलतापूर्वक अंतरिक्ष से लौटकर इतिहास रच दिया। उन्हें ऑर्डर ऑफ लेनिन और हीरो ऑफ सोवियत यूनियन अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया ।
तेरेश्कोव के अंतरिक्ष जाने के लगभग 60 वर्षों बाद, 60 से अधिक महिलाओं ने अंतरिक्ष की यात्रा की है। हालांकि, अब तक, पुरुषों की तुलना में, महिलाओं आबादी केवल 10 फीसदी है।