पहले खुद की प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जेएनयू
जेएनयू पहले विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (जेएनयूईई) आयोजित करता था। हालांकि, स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) प्रवेश के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) की शुरुआत के बाद, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, जेएनयू ने यूजीसी के नेट के माध्यम से पीएचडी छात्रों को प्रवेश देना शुरू कर दिया।
इस वर्ष, यूजीसी-नेट जेआरएफ और सीयूईटी जैसी केंद्रीय रूप से प्रबंधित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण पीएचडी और अन्य कार्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ा है। हालांकि, इन-हाउस प्रवेश परीक्षा आयोजित करने से विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण तार्किक और वित्तीय चुनौतियां हो सकती हैं।
अधिकारियों ने कहा कि वैकल्पिक रूप से, जेएनयू यूजीसी से इन विषयों को नेट सूची में शामिल करने का अनुरोध कर सकता है, लेकिन यह दृष्टिकोण समय लेने वाला है और प्रवेश में और देरी कर सकता है।
एक अन्य विकल्प जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को प्रवेश देना है, लेकिन इसमें नेट या गैर-नेट आवेदकों के माध्यम से अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार शामिल नहीं होंगे।
इन-हाउस परीक्षा भी बढ़ी चुनौती
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा, "विश्वविद्यालय सीमित समय और संसाधनों से जूझ रहा है। इन-हाउस परीक्षा आयोजित करने के लिए धन की आवश्यकता होती है, और इन विषयों को नेट सूची में शामिल करने में महीनों लग सकते हैं।"
एक समिति सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "समिति जल्द ही तय करेगी कि आंतरिक परीक्षा आयोजित की जाए या यूजीसी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया जाए, लेकिन दोनों ही विकल्पों से प्रवेश प्रक्रिया में देरी हो सकती है।"