मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगरपुरवाला और जस्टिस संदीप वी मार्ने ने की। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अनुभा एस सहाय द्वारा दायर जनहित याचिका पर फैसला किया कि परीक्षा स्थगित करने का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। परीक्षा को अप्रैल तक टालने से छात्रों को मई में दूसरे सत्र की तैयारी करने में समस्या होगी। इसलिए परीक्षा स्थगित नहीं की जा सकती है।
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बहुत ही कम समय के नोटिस पर परीक्षा की घोषणा की और जेईई मेन का जनवरी सत्र कुछ राज्य बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा, प्री-बोर्ड और सीबीएसई, आईसीएसई की वाइवा-वॉयस परीक्षा से टकरा रही हैं। वहीं, याचिका में 75 प्रतिशत पात्रता मानदंड में छूट की भी मांग की गई है। उधर, रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जेईई मेन और जेईई एडवांस परीक्षा के लिए 75 प्रतिशत पात्रता मानदंड के मुद्दे पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की है।
बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, छात्रों ने बोर्ड परीक्षा 2023 टाइम-टेबल और सीबीएसई प्रैक्टिकल परीक्षाओं के साथ टकराव के कारण जेईई मेन 2023 सत्र-1 को स्थगित करने के लिए कहा है। छात्रों ने यह भी कहा है कि जेईई मेन परीक्षा के लिए पिछली घोषणाओं की तुलना में, एनटीए ने जेईई मेन 2023 को बेहद कम नोटिस पर जारी किया है, जिससे उम्मीदवारों को तैयारी के लिए केवल एक महीने का समय मिला है।
एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर के अनुसार, संयुक्त प्रवेश परीक्षा, जेईई मेन 2023 का पहला सत्र 24 जनवरी से 31 जनवरी, 2023 तक निर्धारित किया गया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार जेईई मेन जनवरी 2023 सत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है परीक्षा, इसके अप्रैल सत्र में उपस्थित हो सकते हैं।