जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सेना के साथ-साथ सियासी हलचल भी तेज है। स्कूल-कॉलेजों से लेकर उच्च गति की इंटरनेट सेवाएं तक बंद कर दी गई हैं। कोरोना महामारी के कारण परीक्षाएं पहले से ही रद्द और स्थगित हैं। कई जगहों पर धारा-144 लागू कर दी गई है। इन सबके मूल में एक वजह है, वह 2019 में निरस्त किए गए अनुच्छेद-370 और 35ए के विवादित प्रावधान हैं। अब सवाल ये है कि आखिर ये अनुच्छेद हटने से जम्मू-कश्मीर में ऐसा क्या बदल गया? क्यों इस पर इतना बवाल हो रहा है? आगे समझें इन सवालों के जवाब...
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35ए के प्रावधान 17 नवंबर, 1952 से लागू थे। ये अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर और यहां के नागरिकों को कुछ अधिकार और सुविधाएं देते थे, जो देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। जब सरकार अनुच्छेद-370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त कर दिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया तो वहां की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गई। साथ ही साथ यहां के नागरिकों को मिलने वाले कुछ विशेष अधिकारों और सुविधाओं में भी कटौती हुई। यहां जानिए, वे कौन सी अहम चीजें हैं जो बदल गईं ...