जामिया प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ पर शिक्षा मंत्री सख्त
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
नई दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन बुधवार को 17वें दिन भी जारी रहा। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विश्वविद्यालय परिसर में हुई कथित तोड़फोड़ की निंदा की और कहा कि सरकार किसी भी तरह का हुड़दंग या उपद्रवी व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगी।
जोशी ने कहा,
“जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जो हुआ, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। वहां 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। पिछली बार जब चुनाव हुए थे, तब हिंसा की एक गंभीर घटना हुई थी, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रोक दी गई थी।”
उन्होंने आगे कहा,
“चुनाव कराने की मांग उठाई गई थी, लेकिन कुछ लोग विश्वविद्यालय-विरोधी गतिविधियों में भी शामिल थे। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन यह आरोप भी लगाया गया कि कुछ निर्दोष लोगों को भी निशाना बनाया गया।”
छात्रों की शिकायतों के लिए बनाई गई सात सदस्यीय समिति
शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों की सभी मांगों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति छात्रों की शिकायतों की जांच करेगी।
जोशी ने कहा,
“समिति छात्रों की ओर से उठाई गई शिकायतों की जांच करेगी। हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा। हालांकि, सरकार मास्क पहनकर आने वाले लोगों के हुड़दंग या उपद्रवी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगी। पुलिस में शिकायत पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है और मैं दिल्ली पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच करने की अपील करता हूं।”
विश्वविद्यालय ने लगाया संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को टूटी हुई खिड़कियों की तस्वीरें साझा कीं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ छात्रों ने जबरन परिसर के कुछ हिस्सों में प्रवेश किया और निगरानी कैमरों सहित विश्वविद्यालय की अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। हालांकि, अधिकारियों ने कथित नुकसान के मामले में की जा रही कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करे और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा तय करे। विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। विश्वविद्यालय ने सोमवार को आदेश जारी कर कहा था कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।
आदेश में प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का भी प्रावधान था। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि संविधान को मंजूरी देने की निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। इसी कारण विश्वविद्यालय के आदेश के बावजूद आंदोलन जारी है।